📰 Kotputli News
Breaking News: भारत ने मोदी-ट्रंप मुलाकात में प्रेस को क्यों रखा दूर? सूत्रों ने बताई ट्रंप के अप्रत्याशित व्यवहार की वजह
🕒 2 weeks ago

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फ्रांस में हुई मुलाकात के दौरान भारत सरकार द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल-जवाब नहीं रखने का अनुरोध किए जाने का मामला तूल पकड़ रहा है। सूत्रों के हवाले से आ रही खबरों के मुताबिक, भारत ने यह कदम ट्रंप के 'अप्रत्याशित व्यवहार' को ध्यान में रखते हुए उठाया था। अमेरिकी दूत सर्जियो गोर ने हाल ही में खुलासा किया कि विदेश मंत्रालय (एमईए) ने स्पष्ट तौर पर एक ही मांग रखी थी - प्रेस के सवाल नहीं। इस खुलासे के बाद राजनीतिक गलियारों और मीडिया में बहस तेज हो गई है। सर्जियो गोर के अनुसार, बैठक की तैयारियों के दौरान भारतीय पक्ष ने साफ कर दिया था कि वे नहीं चाहते कि प्रेस कोई सवाल पूछे। गोर ने यह भी कहा कि ट्रंप इस प्रोटोकॉल को भूल गए थे और उन्होंने पत्रकारों के सवालों का जवाब देना शुरू कर दिया। गोर ने भारतीय टीवी न्यूज के माहौल पर टिप्पणी करते हुए कहा, 'जितना देर होता है, शो उतने ही पागलपन भरे होते जाते हैं।' उनके इस बयान ने मीडिया की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, भारत सरकार ने इस पूरे मामले पर सफाई देते हुए कहा है कि यह 'वीवीआईपी दौरों के लिए सामान्य प्रथा' है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि उच्चस्तरीय द्विपक्षीय मुलाकातों में अक्सर प्रेस को सवाल पूछने की अनुमति नहीं दी जाती, ताकि दोनों नेता बिना किसी बाहरी दबाव के खुलकर बातचीत कर सकें। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कोई नई परंपरा नहीं है, बल्कि स्थापित राजनयिक प्रोटोकॉल का हिस्सा है। इस घटनाक्रम ने भारत-अमेरिका संबंधों की जटिलताओं और मीडिया प्रबंधन की रणनीतियों को उजागर किया है। जहां एक ओर ट्रंप के अप्रत्याशित स्वभाव को देखते हुए एहतियात बरतने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर पारदर्शिता और प्रेस की स्वतंत्रता के पैरोकार इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बता रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी बैठकों में प्रेस की अनुपस्थिति कभी-कभी रणनीतिक हितों की पूर्ति करती है, लेकिन यह जनता के जानने के अधिकार से टकराव भी पैदा करती है। निष्कर्षतः, मोदी-ट्रंप मुलाकात में प्रेस को दूर रखने का फैसला राजनयिक सूझबूझ और जोखिम प्रबंधन का मिलाजुला रूप प्रतीत होता है। सरकार का तर्क अपनी जगह सही हो सकता है, लेकिन लोकतंत्र में पारदर्शिता का तकाजा है कि ऐसे निर्णयों की वजह जनता के सामने स्पष्ट की जाए। भविष्य में ऐसी उच्चस्तरीय बैठकों के लिए एक संतुलित नीति अपनाना आवश्यक है, जो राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए मीडिया की भूमिका का भी सम्मान करे।

Stay connected with Kotputli News for latest updates.


📲 Share on WhatsApp
✍️ By Pradeep Yadav | 24 Aug 2026