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Breaking News: अमेरिका का ईरान पर 'आर्थिक डी-डे' का ऐलान, तेहरान ने दी तेल निर्यात रोकने की धमकी
🕒 2 weeks ago

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि दुनिया 'आर्थिक डी-डे' के अंतिम चरण में प्रवेश कर चुकी है। व्हाइट हाउस में एक प्रेस वार्ता के दौरान बेसेंट ने स्पष्ट किया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने वाली गतिविधियों को रोकने के लिए प्रतिबंधों का ऐसा चक्रव्यूह रचा जा रहा है जिससे तेहरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाए। उन्होंने कहा कि यह कोई साधारण दबाव नहीं बल्कि निर्णायक आर्थिक युद्ध का अंतिम पड़ाव है जिसमें ईरान के तेल निर्यात, बैंकिंग तंत्र और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को पूरी तरह अलग-थलग कर दिया जाएगा। इस घोषणा के तुरंत बाद ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया आई है। तेहरान ने पलटवार करते हुए धमकी दी है कि अगर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने प्रतिबंधों को और कड़ा किया तो ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल निर्यात को पूरी तरह रोक देगा। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार को झकझोर देगा और कच्चे तेल की कीमतों में अभूतपूर्व उछाल लाएगा। खाड़ी देशों, विशेषकर सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर, ने इस तनाव पर गहरी चिंता जताई है क्योंकि किसी भी सैन्य टकराव या तेल आपूर्ति बाधित होने का सीधा असर उनकी अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की इस 'आर्थिक डी-डे' रणनीति का उद्देश्य ईरान को परमाणु समझौते की शर्तों पर वापस लाना और क्षेत्र में उसके प्रॉक्सी नेटवर्क को कमजोर करना है। हालांकि, ईरान का रुख बेहद सख्त बना हुआ है और उसने साफ कर दिया है कि वह दबाव में नहीं झुकेगा। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान तेल निर्यात रोकता है तो वैश्विक बाजार में रोजाना 10 से 15 लाख बैरल की कमी आ सकती है, जिससे आर्थिक मंदी का खतरा बढ़ जाएगा। भारत जैसे प्रमुख तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति बेहद नाजुक है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से पूरा करता है और किसी भी आपूर्ति बाधा का सीधा असर महंगाई और चालू खाता घाटे पर पड़ेगा। नई दिल्ली पहले ही अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते ईरान से तेल आयात बंद कर चुका है, लेकिन क्षेत्रीय तनाव बढ़ने पर वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग भी प्रभावित हो सकते हैं। निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी यह आर्थिक शह-मात का खेल अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। जहां एक ओर वाशिंगटन प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाकर तेहरान को घुटने टेकने पर मजबूर करना चाहता है, वहीं ईरान तेल को हथियार बनाकर पलटवार की तैयारी में है। आने वाले दिनों में खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष टकराव से बचने के लिए कूटनीतिक रास्ता तलाशते हैं या फिर टकराव की राह पर आगे बढ़ते हैं।

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✍️ By Pradeep Yadav | 24 Aug 2026