तमिलनाडु सरकार ने चेन्नई के दूसरे हवाईअड्डे के लिए प्रस्तावित परांदूर परियोजना को आधिकारिक तौर पर रद्द करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री विजय ने प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार जनभावनाओं का सम्मान करती है और इस परियोजना को आगे नहीं बढ़ाएगी। इस निर्णय से उन हजारों किसानों और स्थानीय निवासियों को बड़ी राहत मिली है जो लंबे समय से भूमि अधिग्रहण के विरोध में आंदोलन कर रहे थे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि चेन्नई की बढ़ती विमानन जरूरतों को पूरा करने के लिए वैकल्पिक स्थलों की तलाश जल्द शुरू की जाएगी। परांदूर परियोजना को लेकर पिछले कई महीनों से गतिरोध बना हुआ था। स्थानीय किसान संगठनों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का आरोप था कि इस परियोजना के लिए उपजाऊ कृषि भूमि और जल निकायों का अधिग्रहण किया जा रहा है, जिससे उनकी आजीविका और पारिस्थितिकी तंत्र को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी। विरोध प्रदर्शनों में तेजी आने के बाद मुख्यमंत्री विजय ने स्थिति की समीक्षा की और जनहित में परियोजना को वापस लेने का फैसला लिया। इसे लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत और जनभागीदारी की मिसाल बताया जा रहा है। सरकार ने भविष्य की योजना स्पष्ट करते हुए कहा कि चेन्नई के दूसरे हवाईअड्डे के लिए अब नए संभावित स्थलों का वैज्ञानिक और सामाजिक प्रभाव अध्ययन किया जाएगा। इस क्रम में होसुर परियोजना में भी गहरी रुचि दिखाई गई है, जो औद्योगिक नगरी होने के साथ-साथ बेंगलुरु के निकट स्थित है। अधिकारियों का मानना है कि होसुर या इसके आसपास का क्षेत्र बेहतर कनेक्टिविटी और कम जनसंख्या घनत्व के कारण उपयुक्त विकल्प साबित हो सकता है। नए स्थल के चयन में भूमि उपलब्धता, पर्यावरणीय प्रभाव और सामाजिक स्वीकार्यता को प्राथमिकता दी जाएगी। चेन्नई हवाईअड्डे के विस्तार की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मौजूदा हवाईअड्डे पर पांचवें टर्मिनल के निर्माण को मंजूरी दे दी गई है, जिससे यात्री क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह कदम चेन्नई को अंतरराष्ट्रीय विमानन केंद्र के रूप में विकसित करने की रणनीति का हिस्सा है। नए टर्मिनल में आधुनिक सुविधाओं के साथ कार्गो हैंडलिंग क्षमता भी बढ़ाई जाएगी, जिससे व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। निष्कर्षतः, तमिलनाडु सरकार का यह निर्णय विकास और जनकल्याण के बीच संतुलन स्थापित करने की प्रतिबद्धता दर्शाता है। परांदूर परियोजना को रद्द करना जहां जनआकांक्षाओं का सम्मान है, वहीं वैकल्पिक स्थलों की तलाश और चेन्नई हवाईअड्डे का विस्तार भविष्य की जरूरतों के प्रति दूरदृष्टि को प्रदर्शित करता है। आने वाले महीनों में नए हवाईअड्डे के लिए स्थल चयन की प्रक्रिया पारदर्शी और समावेशी तरीके से पूरी होने की उम्मीद है।