तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की संयुक्त राज्य अमेरिका की प्रस्तावित यात्रा को केंद्र सरकार द्वारा अनुमति नहीं दिए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में घमासान मच गया है। इस पूरे प्रकरण के बीच मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के प्रति आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने इस मुद्दे पर खुलकर उनका समर्थन किया है। कांग्रेस ने केंद्र के इस फैसले को 'दोहरा मापदंड' करार देते हुए तीखा हमला बोला है, वहीं भारतीय जनता पार्टी ने केंद्र के निर्णय का बचाव करते हुए इसे नियमों के अनुरूप बताया है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का अमेरिका दौरा आधिकारिक कार्यों के लिए प्रस्तावित था, जिसमें वे अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे डी वेंस और न्यूयॉर्क के विधायक जोहरन मामदानी सहित कई गणमान्य व्यक्तियों से मुलाकात करने वाले थे। हालांकि, केंद्र सरकार ने राजनीतिक मंजूरी देने से इनकार कर दिया, जिसके बाद यह विवाद गहरा गया। रेवंत रेड्डी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि वे खड़गे जी के समर्थन और एकजुटता के लिए आभारी हैं, जिन्होंने संघीय ढांचे को मजबूत करने की बात कही है। कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाते हुए आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार विपक्ष शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपना रही है। पार्टी प्रवक्ताओं ने पूछा है कि जब भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री विदेश यात्राओं पर जाते हैं तो उन्हें सहजता से अनुमति मिल जाती है, लेकिन कांग्रेस शासित तेलंगाना के मुख्यमंत्री को रोका जा रहा है। कांग्रेस ने इसे संविधान की संघीय भावना के खिलाफ बताते हुए केंद्र की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। दूसरी ओर, भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी का कहना है कि विदेश यात्राओं के लिए राजनीतिक मंजूरी एक स्थापित प्रक्रिया के तहत दी जाती है और इसमें किसी भी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होता। भाजपा नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस बेवजह इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रही है और अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए केंद्र पर निराधार आरोप लगा रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर केंद्र-राज्य संबंधों में व्याप्त तनाव को उजागर कर दिया है। जहां एक ओर विपक्षी दल इसे संघीय ढांचे पर हमला बता रहे हैं, वहीं सत्ता पक्ष इसे नियमों का पालन बता रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि यह मुद्दा अब केवल एक मुख्यमंत्री की यात्रा तक सीमित न रहकर संघवाद बनाम केंद्रीयकरण की बड़ी बहस का रूप ले चुका है।