कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वाशिंगटन ने उनके देश के खिलाफ एक तरह से 'व्यापार युद्ध' छेड़ दिया है। कार्नी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'हम पर हमला किया गया है,' और इसे एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा बताया। यह बयान दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं के अचानक टूट जाने के बाद आया है, जिससे द्विपक्षीय संबंधों में तनाव चरम पर पहुंच गया है। कनाडाई सरकार अब इस आक्रामक रुख का मुकाबला करने के लिए जवाबी शुल्क लगाने की तैयारी कर रही है। विवाद की जड़ में अमेरिका द्वारा कनाडाई इस्पात और एल्युमीनियम पर लगाए गए नए भारी शुल्क हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, कनाडा द्वारा ट्रकों पर शुल्क राहत की मांग ने बातचीत को पटरी से उतार दिया। अमेरिकी प्रशासन ने इसे खारिज करते हुए एकतरफा फैसले ले लिए। प्रधानमंत्री कार्नी ने ट्रंप प्रशासन के इस कदम को 'मिसकैलकुलेशन' (भूल) करार दिया और जोर देकर कहा कि कनाडा 'अपने घर में खुद मालिक है' और दबाव में नहीं झुकेगा। उन्होंने संप्रभु आर्थिक नीतियों का बचाव करते हुए कहा कि कनाडा अपने उद्योगों और श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। जवाबी कार्रवाई के तौर पर कनाडा ने अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी शुल्क लगाने की घोषणा की है, जिसमें स्टील, एल्युमीनियम के अलावा कृषि उत्पाद और उपभोक्ता वस्तुएं शामिल हो सकती हैं। 'द हिंदू' और 'बीबीसी' की रिपोर्ट्स के मुताबिक, कनाडा की यह प्रतिक्रिया आनुपातिक और लक्षित होगी, ताकि अमेरिकी अर्थव्यवस्था के उन क्षेत्रों पर असर पड़े जो राजनीतिक रूप से संवेदनशील हैं। कार्नी सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये कदम WTO नियमों के दायरे में रहकर उठाए जाएंगे, लेकिन साथ ही यह चेतावनी भी दी है कि यदि अमेरिका और शुल्क लगाता है तो कनाडा अपने जवाब का दायरा बढ़ाएगा। इस घटनाक्रम ने उत्तर अमेरिकी मुक्त व्यापार समझौते (USMCA) की स्थिरता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह टकराव लंबा खिंच सकता है, जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान होगा, खासकर ऑटो और निर्माण क्षेत्र को। कनाडा के विपक्षी दलों ने भी सरकार के कड़े रुख का समर्थन किया है, जिससे राष्ट्रीय एकता का संदेश जाता है। कार्नी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी नियम-आधारित व्यापार व्यवस्था की रक्षा के लिए समर्थन मांगा है। निष्कर्षतः, कनाडा-अमेरिका संबंध एक नाजुक मोड़ पर खड़े हैं। प्रधानमंत्री कार्नी का दृढ़ रुख दिखाता है कि कनाडा अपनी आर्थिक संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा। हालांकि, दोनों देशों की गहरी आर्थिक परस्पर निर्भरता को देखते हुए, अंततः बातचीत ही एकमात्र व्यावहारिक रास्ता है। देखना होगा कि आने वाले हफ्तों में कूटनीतिक प्रयास इस गतिरोध को तोड़ पाते हैं या व्यापार युद्ध और गहराता है।