अमेरिका और कनाडा के वार्ताकार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा निर्धारित शुल्क समयसीमा से पहले किसी समझौते पर पहुंचने के लिए दिन-रात प्रयासरत हैं। दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव चरम पर पहुंच गया है, जब ट्रंप प्रशासन ने कुछ कनाडाई वस्तुओं पर पचास प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की। इस कदम ने द्विपक्षीय संबंधों में गहरी दरार पैदा कर दी है और वैश्विक व्यापार व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर दिया है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ट्रंप के इस निर्णय को गंभीर भूल करार दिया है और कहा है कि यह कदम दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को भारी नुकसान पहुंचाएगा। कनाडा ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिका के साथ चल रही व्यापार वार्ताओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही कनाडा ने डॉलर के बदले डॉलर की नीति अपनाते हुए अमेरिकी उत्पादों पर समानांतर शुल्क लगाने की घोषणा की है, जिससे व्यापार युद्ध और तेज होने की संभावना बढ़ गई है। इस तनाव का असर उत्तर अमेरिकी मुक्त व्यापार समझौते की रूपरेखा पर भी पड़ रहा है। दोनों देशों के बीच प्रतिवर्ष सैकड़ों अरब डॉलर का व्यापार होता है, जिसमें ऑटोमोबाइल, कृषि उत्पाद, ऊर्जा और कच्चा माल शामिल हैं। नए शुल्कों से आपूर्ति श्रृंखला बाधित होगी, उपभोक्ताओं के लिए कीमतें बढ़ेंगी और उद्योगों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गतिरोध लंबा खिंचा तो वैश्विक आर्थिक सुधार की प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस स्थिति पर निकटता से नजर रखे हुए है। विश्व व्यापार संगठन और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के माध्यम से विवाद सुलझाने का आग्रह किया है। कनाडा ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी अर्थव्यवस्था और श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा, जबकि अमेरिका का रुख अभी भी सख्त बना हुआ है। आने वाले दिन निर्णायक साबित होंगे। यदि वार्ताकार समयसीमा से पहले किसी अंतरिम समझौते पर पहुंच जाते हैं, तो तत्काल संकट टल सकता है। लेकिन यदि गतिरोध जारी रहता है, तो दोनों देशों को दीर्घकालिक आर्थिक क्षति झेलनी पड़ेगी और वैश्विक व्यापार व्यवस्था में अस्थिरता बढ़ेगी। राजनयिक सूझबूझ और व्यावहारिक दृष्टिकोण ही इस संकट का एकमात्र समाधान प्रतीत होता है।