अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव एक नए चरम पर पहुंच गया है जब अमेरिकी प्रशासन ने कनाडाई उत्पादों पर ५० प्रतिशत का भारी-भरकम शुल्क लगा दिया है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ता विफल होने के बाद यह कदम उठाया गया है। अमेरिका का यह निर्णय लगभग २० अरब डॉलर मूल्य के कनाडाई सामानों को प्रभावित करेगा, जिसमें इस्पात, एल्युमीनियम और डेयरी उत्पाद प्रमुख हैं। इस आक्रामक व्यापार नीति ने उत्तर अमेरिकी मुक्त व्यापार समझौते की भावना को गहरी चोट पहुंचाई है और दोनों पड़ोसी देशों के दशकों पुराने आर्थिक संबंधों को खतरे में डाल दिया है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिका के इस कदम को 'गलत गणना' करार देते हुए कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में घोषणा की है कि कनाडा अमेरिकी शुल्कों का जवाब 'डॉलर दर डॉलर' की नीति पर देगा। कार्नी ने कहा कि यह शुल्क न केवल कनाडा बल्कि अमेरिकी उपभोक्ताओं और उद्योगों के लिए भी हानिकारक साबित होगा। कनाडाई सरकार ने ८ सितंबर से अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी दंडात्मक शुल्क लागू करने की घोषणा की है, जिसमें अमेरिकी इस्पात और डेयरी क्षेत्र को विशेष रूप से निशाना बनाया जाएगा। यह जवाबी कार्रवाई अमेरिका को वार्ता की मेज पर वापस लाने के लिए दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि इस तनाव का असर दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा। कनाडा अमेरिका का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, और प्रतिदिन करोड़ों डॉलर का व्यापार सीमा पार होता है। शुल्क युद्ध से आपूर्ति श्रृंखला बाधित होगी, महंगाई बढ़ेगी और रोजगार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। कनाडा की जनता भी सरकार से सख्त रुख अपनाने की मांग कर रही है। हालिया सर्वेक्षणों के अनुसार, अधिकांश कनाडाई नागरिक अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में कड़े दृष्टिकोण के पक्ष में हैं और वे किसी भी प्रकार की रियायत के विरोध में हैं। अंतरराष्ट्रीय व्यापार समुदाय इस विवाद को चिंता से देख रहा है। विश्व व्यापार संगठन के नियमों के तहत दोनों देशों के पास विवाद निपटान के तंत्र मौजूद हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में द्विपक्षीय वार्ता ही एकमात्र व्यावहारिक समाधान प्रतीत होता है। कनाडा ने स्पष्ट किया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और उद्योगों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, साथ ही वह वार्ता के दरवाजे खुले रखने का इच्छुक भी है। अमेरिका के आगामी चुनावी चक्र को देखते हुए, यह व्यापार युद्ध राजनीतिक रंग भी ले सकता है। निष्कर्षतः, अमेरिका-कनाडा व्यापार युद्ध वैश्विक व्यापार व्यवस्था के लिए एक गंभीर चुनौती प्रस्तुत करता है। दोनों देशों के नेतृत्व को संयम और दूरदर्शिता का परिचय देते हुए वार्ता के माध्यम से इस गतिरोध को समाप्त करना होगा। संरक्षणवादी नीतियां अल्पकालिक राजनीतिक लाभ भले ही दें, लेकिन दीर्घकाल में ये दोनों अर्थव्यवस्थाओं को क्षति पहुंचाती हैं। आशा है कि शीघ्र ही विवेकपूर्ण निर्णय लेकर दोनों पड़ोसी अपने परस्पर लाभकारी संबंधों को पुनर्स्थापित करेंगे।