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Breaking News: भाजपा का वंदे मातरम् पर 10 सूत्रीय प्रस्ताव: कांग्रेस पर तीखा हमला, राष्ट्रव्यापी आंदोलन की चेतावनी
🕒 2 weeks ago

भारतीय जनता पार्टी ने वंदे मातरम् को लेकर एक महत्वपूर्ण 10 सूत्रीय प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति करने का गंभीर आरोप लगाया गया है। इस प्रस्ताव में महात्मा गांधी के विचारों का हवाला देते हुए वंदे मातरम् को 'साम्राज्यवाद विरोधी नारा' बताया गया है। भाजपा ने स्पष्ट किया है कि वह इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेगी और देशभर में इसके समर्थन में आंदोलन चलाएगी। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब वंदे मातरम् को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। प्रस्ताव के मुख्य बिंदुओं में कहा गया है कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा है। भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा इसकी उपेक्षा की और तुष्टिकरण की नीति अपनाई। प्रस्ताव में महात्मा गांधी, सरदार पटेल और रवींद्रनाथ टैगोर के विचारों का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि इन महापुरुषों ने वंदे मातरम् को राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीक माना था। भाजपा नेतृत्व का कहना है कि कांग्रेस ने जानबूझकर इसके पूर्ण गायन को रोका ताकि एक विशेष वर्ग को खुश किया जा सके। इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा पर पलटवार करते हुए पूछा है कि इतने वर्षों तक वंदे मातरम् का पूरा गायन क्यों नहीं किया गया। खड़गे ने दावा किया कि कांग्रेस गांधी, पटेल और टैगोर द्वारा तय संस्करण का ही पालन करती आई है। उन्होंने भाजपा पर इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया। द वायर की एक रिपोर्ट में टैगोर के उस पत्र का जिक्र है जिसमें उन्होंने वंदे मातरम् के पूर्ण गायन पर आपत्ति जताई थी, जिससे यह बहस और जटिल हो गई है। भाजपा ने इस प्रस्ताव के बाद राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। पार्टी कार्यकर्ता हर जिले में वंदे मातरम् का पूर्ण गायन कराएंगे और जनजागरण अभियान चलाएंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आगामी चुनावों में भाजपा के लिए राष्ट्रवाद का प्रमुख हथियार बनेगा। कांग्रेस के लिए यह स्थिति असहज करने वाली है क्योंकि उसे एक तरफ मुस्लिम वोट बैंक की चिंता है तो दूसरी तरफ राष्ट्रवादी भावनाओं की उपेक्षा का आरोप। निष्कर्षतः, वंदे मातरम् पर भाजपा का यह आक्रामक रुख भारतीय राजनीति में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की नई लहर का संकेत है। जहां भाजपा इसे राष्ट्रीय गौरव से जोड़कर जनमानस को लामबंद करने का प्रयास कर रही है, वहीं विपक्ष इसे ध्रुवीकरण की राजनीति बता रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मुद्दा जनमानस को कितना प्रभावित करता है और राजनीतिक दल इससे क्या सीख लेते हैं।

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✍️ By Pradeep Yadav | 22 Aug 2026