📰 Kotputli News
Breaking News: कनाडा ने अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता निलंबित की, प्रधानमंत्री कार्नी बोले - 'डॉलर दर डॉलर' देंगे टैरिफ का जवाब
🕒 2 weeks ago

कनाडा ने संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ चल रही महत्वपूर्ण व्यापार वार्ताओं को अचानक निलंबित करने की घोषणा कर दी है, जिससे दोनों उत्तरी अमेरिकी पड़ोसियों के बीच पहले से तनावपूर्ण व्यापार संबंध और अधिक बिगड़ गए हैं। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने एक कड़े बयान में अमेरिका द्वारा लगाए गए नए शुल्कों को 'अनुचित' और 'अन्यायपूर्ण' करार देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि उनका देश चुप नहीं बैठेगा। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि कनाडा अमेरिकी टैरिफ का जवाब 'डॉलर दर डॉलर' की नीति अपनाकर देगा, जिससे एक पूर्ण विकसित व्यापार युद्ध की आशंका प्रबल हो गई है। यह निर्णय तब आया जब वाशिंगटन ने कनाडाई इस्पात और एल्युमीनियम उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक का भारी भरकम शुल्क लगाने की घोषणा की, जिससे लगभग 20 अरब डॉलर मूल्य का कनाडाई निर्यात प्रभावित होगा। अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि ये कदम राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए उठाए गए हैं, लेकिन कनाडा इसे विश्व व्यापार संगठन के नियमों और दोनों देशों के बीच मौजूद मुक्त व्यापार समझौतों का खुला उल्लंघन मान रहा है। प्रधानमंत्री कार्नी ने कहा कि जब एक मित्र और सहयोगी देश इस तरह की एकतरफा कार्रवाई करता है, तो बातचीत का कोई अर्थ नहीं रह जाता। कनाडा की जवाबी कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की जा रही है और सरकार ने संकेत दिए हैं कि वह अमेरिकी कृषि उत्पादों, इस्पात, एल्युमीनियम और उपभोक्ता वस्तुओं पर समानांतर शुल्क लगा सकती है। इससे पहले भी 2018 में जब तत्कालीन ट्रम्प प्रशासन ने इसी तरह के शुल्क लगाए थे, तब कनाडा ने 'डॉलर दर डॉलर' प्रतिशोधात्मक उपाय किए थे। हालांकि, इस बार स्थिति अधिक गंभीर है क्योंकि वैश्विक अर्थव्यवस्था पहले से ही मुद्रास्फीति और आपूर्ति श्रृंखला के संकट से जूझ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तनातनी का असर दोनों देशों के उपभोक्ताओं और उद्योगों पर पड़ेगा, जिससे महंगाई बढ़ सकती है। व्यापार विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि यह टकराव उत्तर अमेरिकी मुक्त व्यापार समझौते (यूएसएमसीए) की भावना के विपरीत है और इससे एकीकृत उत्तर अमेरिकी बाजार की स्थिरता खतरे में पड़ सकती है। कनाडा की विपक्षी पार्टियों ने भी सरकार के कदम का समर्थन करते हुए कहा कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए दृढ़ता आवश्यक है। वहीं, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने अभी तक कनाडा की घोषणा पर औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन विश्लेषकों का अनुमान है कि इससे तनाव और बढ़ सकता है। अंततः, यह प्रकरण दर्शाता है कि घनिष्ठ मित्र देशों के बीच भी आर्थिक हितों के टकराव कैसे कूटनीतिक संबंधों को पटरी से उतार सकते हैं। प्रधानमंत्री कार्नी का कड़ा रुख घरेलू राजनीतिक दबाव और राष्ट्रीय गरिमा की रक्षा की आवश्यकता को दर्शाता है। अब गेंद अमेरिकी प्रशासन के पाले में है कि वह तनाव कम करने के लिए बातचीत की मेज पर लौटता है या संरक्षणवादी नीतियों पर अड़ा रहता है। कनाडा ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने उद्योगों और श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा, भले ही इसकी आर्थिक कीमत चुकानी पड़े।

Stay connected with Kotputli News for latest updates.


📲 Share on WhatsApp
✍️ By Pradeep Yadav | 22 Aug 2026