अमेरिका ने कनाडा से आयात होने वाले 20 अरब डॉलर मूल्य के सामान पर 50 प्रतिशत का भारी शुल्क लगा दिया है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव चरम पर पहुंच गया है। यह कदम दोनों पक्षों के बीच लंबी चली बातचीत के विफल होने के बाद उठाया गया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि कनाडा की व्यापार नीतियां अनुचित हैं और इससे अमेरिकी उद्योगों को नुकसान हो रहा है। इस फैसले से कनाडा के इस्पात, एल्युमिनियम, कृषि उत्पाद और ऑटो पार्ट्स जैसे प्रमुख क्षेत्र प्रभावित होंगे। कनाडा ने इस कदम को 'अन्यायपूर्ण और गैर-आर्थिक' करार देते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने घोषणा की है कि कनाडा अमेरिकी शुल्कों का 'डॉलर के बदले डॉलर' से जवाब देगा। उन्होंने अमेरिका के साथ चल रही व्यापार वार्ता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। कार्नी ने कहा कि यह शुल्क दोनों देशों के दशकों पुराने आर्थिक संबंधों को कमजोर करेगा और आम नागरिकों पर महंगाई का बोझ डालेगा। कनाडा के व्यापार मंत्री डॉमिनिक लेब्लांक ने भी कहा कि बातचीत के लिए अभी और काम करने की जरूरत थी, लेकिन अमेरिका ने एकतरफा कार्रवाई करके भरोसा तोड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तनाव से उत्तर अमेरिकी मुक्त व्यापार समझौते (यूएसएमसीए) की नींव हिल सकती है। दोनों देश एक-दूसरे के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं, और प्रतिदिन अरबों डॉलर का कारोबार होता है। शुल्क युद्ध से सप्लाई चेन बाधित होगी, उपभोक्ताओं के लिए कीमतें बढ़ेंगी और उद्योगों में नौकरियों पर संकट आएगा। कनाडा पहले ही जवाबी शुल्कों की सूची तैयार कर रहा है, जिसमें अमेरिकी कृषि उत्पाद, व्हिस्की, और औद्योगिक सामान शामिल हो सकते हैं। अंत में, यह विवाद वैश्विक व्यापार व्यवस्था के लिए एक चिंताजनक संकेत है। संरक्षणवादी नीतियों का यह दौर अगर जारी रहा तो आर्थिक सुधार की गति धीमी पड़ सकती है। दोनों देशों के नेताओं के लिए अब भी कूटनीतिक रास्ता खुला है, लेकिन इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और आपसी सम्मान की आवश्यकता होगी। दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या ये दोनों पड़ोसी बातचीत की मेज पर लौटकर संकट को टाल पाएंगे या व्यापार युद्ध एक नए युग की शुरुआत करेगा।