महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। यहां एक किशोर की महंगे मोबाइल फोन की जिद ने उसके पूरे परिवार को मौत के मुंह में धकेल दिया। पहाड़ी इलाके में स्थित एक पर्यटन स्थल पर हुए इस भयावह हादसे में 17 वर्षीय किशोर और उसके माता-पिता समेत कुल तीन लोगों की जान चली गई। पुलिस के अनुसार, यह घटना पारिवारिक कलह और भौतिकवादी दौड़ का एक भयानक परिणाम है, जिसने एक खुशहाल परिवार को पल भर में तबाह कर दिया। घटना की जड़ में किशोर की आईफोन खरीदने की जिद बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, किशोर लंबे समय से अपने माता-पिता पर नया आईफोन खरीदने का दबाव बना रहा था। आर्थिक तंगी के चलते पिता ने ईएमआई पर फोन लेने से इनकार कर दिया या उसे फिलहाल खरीद पाने में असमर्थता जताई। इससे नाराज होकर किशोर घर से निकल गया और शहर के बाहरी इलाके में स्थित एक गहरी खाई वाली पहाड़ी पर पहुंच गया। वहां उसने आत्महत्या करने की नीयत से छलांग लगा दी। बेटे को खाई की ओर जाते देख पिता बदहवास होकर उसे बचाने के लिए पीछे भागे। पिता ने खाई के किनारे पहुंचकर बेटे का हाथ पकड़कर उसे ऊपर खींचने की भरसक कोशिश की, लेकिन किशोर का वजन और फिसलन भरी जमीन के कारण पिता का संतुलन बिगड़ गया और वह भी बेटे के साथ गहरी खाई में गिर पड़े। यह मंजर देखकर मां का कलेजा फट पड़ा और वह भी बिना कुछ सोचे-समझे पति और बेटे को बचाने के लिए खाई में कूद पड़ीं। चंद सेकंडों में ही पूरा परिवार सैकड़ों फीट गहरी खाई में समा गया। स्थानीय लोगों और पुलिस को सूचना मिलने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन तीनों की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। पुलिस ने शवों को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि परिवार पर कर्ज का बोझ था और किशोर की महंगी चीजों की मांग लगातार बढ़ रही थी। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि सोशल मीडिया और साथियों के दबाव में आकर युवा पीढ़ी भौतिक सुख-सुविधाओं के पीछे इस कदर भाग रही है कि उसे अपने जीवन और परिवार का मूल्य समझ नहीं आता। यह घटना अभिभावकों के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है कि वे बच्चों की हर जिद पूरी करने के बजाय उन्हें जीवन के वास्तविक मूल्य और आर्थिक वास्तविकताओं से अवगत कराएं। इस हृदयविदारक घटना ने समाज के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक मोबाइल फोन की कीमत तीन जिंदगियों से कहीं ज्यादा नहीं हो सकती, फिर भी भौतिकवाद की अंधी दौड़ ने एक परिवार को खत्म कर दिया। जरूरत इस बात की है कि माता-पिता बच्चों के साथ संवाद स्थापित करें, उनकी मानसिक स्थिति को समझें और उन्हें भावनात्मक रूप से मजबूत बनाएं। साथ ही युवाओं को भी यह समझना होगा कि जीवन अनमोल है और क्षणिक आवेश या सामाजिक दबाव में आकर इसे दांव पर लगाना किसी समस्या का हल नहीं है। इस दुखद घटना से सबक लेकर समाज को अपनी प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार करना होगा।