राजस्थान की राजधानी जयपुर में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है जब सिटीजन फॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) की एक टीम ने आरोप लगाया कि सरकारी स्कूलों के निरीक्षण के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने उन पर हमला किया। सीजेपी के स्वयंसेवकों का दावा है कि उनके हाथ तोड़ दिए गए और वाहनों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया। यह घटना तब हुई जब सीजेपी की टीम राज्य में शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत जानने के लिए ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों का दौरा कर रही थी। इस घटना के बाद सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों ने कड़ी निंदा करते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। इस पूरे प्रकरण की पृष्ठभूमि में राजस्थान सरकार का वह स्वीकारोक्ति भी शामिल है जिसमें माना गया है कि प्रदेश के 611 स्कूलों के पास अपने भवन ही नहीं हैं। सीजेपी लंबे समय से शिक्षा के अधिकार और स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को लेकर अभियान चला रही है। टीम के सदस्य अशोक रंका ने सीधे तौर पर भाजपा कार्यकर्ताओं पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता अभिजीत दीपके ने चेतावनी दी है कि अगर न्याय नहीं मिला तो दिल्ली के जंतर मंतर की तर्ज पर राजस्थान में भी बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है लेकिन अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि वे निष्पक्ष जांच कर रहे हैं और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि, भाजपा की ओर से इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया गया है। पार्टी प्रवक्ता का कहना है कि सीजेपी की टीम बिना अनुमति के स्कूलों में घुसकर माहौल खराब कर रही थी। इस आरोप-प्रत्यारोप के बीच ग्रामीण इलाकों में तनाव बना हुआ है और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं स्कूली शिक्षा की बदहाली पर पर्दा डालने की कोशिश है। जब सरकार खुद मान रही है कि सैकड़ों स्कूल बिना भवन के चल रहे हैं, तो ऐसी स्थिति में नागरिक संगठनों के निरीक्षण को रोकना या उन पर हमला करना गंभीर चिंता का विषय है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि शिक्षा जैसे बुनियादी मुद्दे पर भी राजनीतिक हित साधे जा रहे हैं। अब सबकी निगाहें पुलिस जांच और आगामी दिनों में होने वाले संभावित आंदोलन पर टिकी हैं। यदि समय रहते दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला राजस्थान की राजनीति में बड़ा मोड़ ले सकता है। नागरिक समाज की मांग है कि स्कूलों की दशा सुधारने के साथ-साथ सच सामने लाने वालों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए।