केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस द्वारा वंदे मातरम् के केवल दो छंद गाने के निर्णय पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे 'तुष्टीकरण की राजनीति' और कानून की खुली अवहेलना करार दिया। शाह ने कहा कि वंदे मातरम् देश का राष्ट्रीय गीत है और इसका अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह बयान उत्तर प्रदेश में चल रहे राजनीतिक घमासान के बीच आया है, जहां भाजपा, कांग्रेस, सपा और आप आमने-सामने हैं। विवाद की शुरुआत तब हुई जब कांग्रेस ने अपने अधिवेशन में वंदे मातरम् के केवल प्रथम दो छंद गाने का फैसला लिया। भाजपा ने इसे राष्ट्रवाद के प्रति कांग्रेस की उदासीनता बताते हुए जोरदार विरोध किया। अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस का यह कदम वोट बैंक की राजनीति के लिए राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान है। उन्होंने याद दिलाया कि संविधान सभा में भी वंदे मातरम् को पूर्ण रूप से अपनाया गया था और इसे राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया गया था। इस बीच, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पलटवार करते हुए भाजपा सरकार को चुनौती दी कि अगर वंदे मातरम् का अपमान हुआ है तो महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराएं। खड़गे ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान किया है और भाजपा बेवजह विवाद खड़ा कर रही है। उत्तर प्रदेश में यह मुद्दा चुनावी रंग ले चुका है, जहां सभी दल अपने-अपने पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वंदे मातरम् पर छिड़ा यह विवाद आगामी चुनावों में बड़ा मुद्दा बन सकता है। भाजपा इसे राष्ट्रवाद बनाम तुष्टीकरण का नैरेटिव देने की कोशिश कर रही है, जबकि विपक्षी दल इसे संविधान और अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बता रहे हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह मुद्दा धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा होने के कारण बेहद संवेदनशील है। निष्कर्षतः, वंदे मातरम् पर चल रहा यह विवाद केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान और राजनीतिक लाभ के लिए उनके इस्तेमाल की बहस को तेज करता है। अमित शाह के कड़े रुख और खड़गे की चुनौती ने इस मुद्दे को और गरमा दिया है। देखना होगा कि जनता की अदालत में यह मुद्दा किस करवट बैठता है, लेकिन इतना तय है कि राष्ट्रीय गीत का सम्मान हर दल की प्राथमिकता होनी चाहिए, न कि राजनीतिक हथियार।