नई दिल्ली में राजनयिक तनाव के बीच भारतीय अधिकारियों ने शनिवार को चाणक्यपुरी स्थित पाकिस्तान उच्चायोग के बाहर बने अनधिकृत ढांचों और सुरक्षा अवरोधकों को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया। नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम ने भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच यह कार्रवाई की, जिसे इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग के निकट पाकिस्तानी एजेंसियों द्वारा हाल ही में सुरक्षा खंभों और बैरिकेड्स हटाए जाने का सीधा जवाबी कदम माना जा रहा है। इस घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच राजनयिक पारस्परिकता और विएना संधि के प्रावधानों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, शनिवार सुबह एनडीएमसी के अतिक्रमण विरोधी दस्ते ने जेसीबी मशीनों की मदद से पाकिस्तान उच्चायोग के मुख्य द्वार के सामने बने अवैध कैबिन, सुरक्षा बूथ और सड़क पर लगे बोलार्ड (खंभे) को हटा दिया। इस दौरान दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान बड़ी संख्या में तैनात रहे ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। कार्रवाई के बाद इलाके में यातायात सामान्य रूप से बहाल कर दिया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ये ढांचे सड़क पर अनधिकृत कब्जा करके बनाए गए थे, जो नगरपालिका नियमों और यातायात सुरक्षा मानदंडों का उल्लंघन करते थे। यह कार्रवाई एकतरफा नहीं है, बल्कि इसकी पृष्ठभूमि में इस्लामाबाद की हालिया गतिविधि है। कुछ दिन पूर्व पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग के बाहर लगे सुरक्षा खंभों और बैरिकेड्स को पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा बिना पूर्व सूचना के हटा दिया गया था। भारत ने इसे राजनयिक मिशनों की सुरक्षा पर विएना संधि का उल्लंघन मानते हुए कड़ा ऐतराज जताया था। राजनयिक सूत्रों का कहना है कि नई दिल्ली में की गई कार्रवाई 'पारस्परिकता के सिद्धांत' पर आधारित है, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान को यह संदेश देना है कि भारतीय राजनयिकों की सुरक्षा से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हालांकि, विदेश मंत्रालय की ओर से इस विशिष्ट कार्रवाई पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन राजनयिक हलकों में इसे तनाव कम करने के बजाय 'जैसे को तैसा' की नीति के रूप में देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि इस तरह की जवाबी कार्रवाइयों से दोनों देशों के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों पर और असर पड़ सकता है। फिर भी, भारत का रुख स्पष्ट रहा है कि वह राजनयिक समानता और अपने कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव कदम उठाएगा, फिर चाहे वह अतिक्रमण हटाने जैसी नागरिक कार्रवाई के रूप में ही क्यों न हो। समाचार लिखे जाने तक पाकिस्तान उच्चायोग की ओर से इस कार्रवाई पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं, इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई है। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि राजनयिक मोर्चे पर दोनों देश एक-दूसरे की गतिविधियों पर पैनी नजर रख रहे हैं और किसी भी एकतरफा बदलाव का त्वरित जवाब दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनयिक स्तर पर बातचीत या औपचारिक विरोध दर्ज कराने की प्रक्रिया देखने को मिल सकती है।