भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी के वकील विजय अग्रवाल को लंदन में गिरफ्तार कर लिया गया है। ब्रिटिश अधिकारियों ने उन्हें यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों में हिरासत में लिया है और फिलहाल वे जेल में हैं। यह घटनाक्रम भारतीय जांच एजेंसियों के लिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि अग्रवाल लंबे समय से चोकसी के कानूनी मामलों को संभाल रहे थे और उनके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा रहे थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विजय अग्रवाल की गिरफ्तारी यूके के आव्रजन अधिकारियों द्वारा की गई है। शुरुआती जानकारी में यौन उत्पीड़न के आरोप सामने आए हैं, लेकिन कुछ सूत्रों का यह भी कहना है कि उन पर आव्रजन नियमों के उल्लंघन और भारी मात्रा में नकदी बरामदगी से जुड़े मामले भी दर्ज किए गए हैं। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अग्रवाल के सहयोगियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि नकदी बरामदगी का उनकी गिरफ्तारी से कोई संबंध नहीं है। हालांकि, ब्रिटिश पुलिस ने अभी तक आधिकारिक तौर पर सभी आरोपों का विस्तृत ब्योरा जारी नहीं किया है। इस गिरफ्तारी ने मेहुल चोकसी के प्रत्यर्पण मामले में नई जटिलताएं पैदा कर दी हैं। चोकसी फिलहाल एंटीगुआ और बारबुडा में रह रहा है और भारत उसके प्रत्यर्पण के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। विजय अग्रवाल चोकसी की कानूनी टीम का अहम हिस्सा थे और ब्रिटेन की अदालतों में उनका पक्ष रखते रहे हैं। ऐसे में उनकी गिरफ्तारी से चोकसी की कानूनी रणनीति पर असर पड़ सकता है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी आशंका जताई गई है कि अग्रवाल की गिरफ्तारी के तार कथित अलगाववादी फंडिंग से जुड़े हो सकते हैं, जिससे मामला और पेचीदा हो गया है। भारतीय जांच एजेंसियां इस घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) पहले से ही चोकसी के खिलाफ पंजाब नेशनल बैंक घोटाले में जांच कर रही हैं। अग्रवाल की गिरफ्तारी से इन जांचों में नए पहलू सामने आ सकते हैं, खासकर अगर नकदी बरामदगी और फंडिंग के आरोप सही साबित होते हैं। हालांकि, अग्रवाल के सहयोगियों ने इन सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि यह उनके मुवक्किल को बदनाम करने की साजिश हो सकती है। कुल मिलाकर, विजय अग्रवाल की लंदन में गिरफ्तारी एक बड़ा घटनाक्रम है जिसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। जहां एक ओर यह ब्रिटेन में भारतीय भगोड़ों के नेटवर्क पर सवाल खड़े करता है, वहीं दूसरी ओर यह मेहुल चोकसी के प्रत्यर्पण की राह में नई बाधा भी बन सकता है। आने वाले दिनों में ब्रिटिश अदालतों में इस मामले की सुनवाई और भारतीय एजेंसियों की प्रतिक्रिया से स्थिति और स्पष्ट होगी। फिलहाल, कानूनी बिरादरी और जांच एजेंसियां दोनों ही इस मामले के हर पहलू पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं।