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Breaking News: झारखंड में 16 दिनों की भूख हड़ताल समाप्त, देवेंद्र नाथ महतो ने तोड़ा अनशन, JSSC-CGL परीक्षा रद्द होने के बाद बनी सहमति
🕒 3 weeks ago

झारखंड की राजधानी रांची में पिछले 16 दिनों से चल रहा छात्रों का आंदोलन गुरुवार को एक बड़े मोड़ पर पहुंच गया जब आंदोलन के प्रमुख चेहरे देवेंद्र नाथ महतो ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की। यह फैसला राज्य सरकार द्वारा विवादित JSSC-CGL (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग संयुक्त स्नातक स्तरीय) भर्ती परीक्षा को रद्द करने की मांग मान लिए जाने के बाद आया। महतो ने जूस पीकर अपना अनशन तोड़ा, जिसके बाद उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। इसे छात्रों की एक 'ऐतिहासिक जीत' के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि लंबे संघर्ष के बाद सरकार को झुकना पड़ा। विवाद की शुरुआत JSSC-CGL परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों और अनियमितताओं की शिकायतों के बाद हुई थी। हजारों अभ्यर्थी परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए सड़कों पर उतर आए थे। देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व में छात्रों का एक समूह आमरण अनशन पर बैठ गया था। उनकी मुख्य मांग थी कि भ्रष्टाचार की जड़ तक पहुंच चुकी इस परीक्षा को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए और दोबारा पारदर्शी तरीके से आयोजित कराया जाए। 16 दिनों तक चले इस अनशन के दौरान महतो की हालत बिगड़ने लगी थी, जिससे प्रशासन पर दबाव लगातार बढ़ रहा था। अंततः हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने छात्रों के भविष्य और संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए परीक्षा रद्द करने का आदेश जारी कर दिया। हालांकि, इस फैसले से जहां एक तरफ अनशनरत छात्रों में जश्न का माहौल है, वहीं दूसरी तरफ करीब दो हजार ऐसे अभ्यर्थियों में मायूसी और आक्रोश भी है जिन्होंने मेहनत से परीक्षा पास की थी और उन्हें नौकरी मिलने की उम्मीद थी। इन अभ्यर्थियों का कहना है कि कुछ गलत तत्वों की करतूत की सजा सभी ईमानदार छात्रों को नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की है कि रद्द की गई परीक्षा के स्थान पर नई परीक्षा की तिथि जल्द घोषित की जाए और चयन प्रक्रिया में तेजी लाई जाए ताकि उनका भविष्य अधर में न लटके। फिलहाल तीन अन्य प्रदर्शनकारी अभी भी अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर डटे हुए हैं। इस पूरे घटनाक्रम पर राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं आई हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने हेमंत सोरेन सरकार और आंदोलनरत छात्रों के बीच बनी सहमति की सराहना करते हुए इसे 'सही रास्ता' बताया। उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज सुनना और उनकी जायज मांगों को मानना लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस फैसले से आगामी चुनावों में युवा मतदाताओं के बीच सरकार की छवि सुधरेगी, लेकिन साथ ही परीक्षा रद्द होने से प्रभावित अभ्यर्थियों की नाराजगी को संभालना भी एक बड़ी चुनौती होगी। निष्कर्षतः, झारखंड में JSSC-CGL परीक्षा रद्द होने और देवेंद्र नाथ महतो के अनशन समाप्त होने के साथ एक अध्याय का अंत हुआ है, लेकिन नई परीक्षा की पारदर्शिता, समयबद्ध आयोजन और प्रभावित अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा जैसे सवाल अभी भी बाकी हैं। सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है: एक ओर जहां आंदोलनकारी छात्रों का विश्वास बनाए रखना है, वहीं दूसरी ओर मेरिट के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों के साथ न्याय करना है। आने वाले दिनों में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की कार्यशैली में सुधार और नई भर्ती प्रक्रिया की घोषणा ही इस पूरे प्रकरण का वास्तविक समाधान तय करेगी।

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✍️ By Pradeep Yadav | 18 Aug 2026