अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत की चुनावी व्यवस्था की प्रशंसा करते हुए अपने देश में मतदाता पहचान पत्र अनिवार्य करने वाले 'सेव अमेरिका एक्ट' के लिए समर्थन जुटाने का प्रयास किया है। ट्रंप ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के एक बयान का हवाला देते हुए कहा कि जब भारत जैसा विशाल लोकतांत्रिक देश अपने नागरिकों को मतदाता पहचान पत्र जारी कर सकता है, तो अमेरिका में ऐसा क्यों नहीं हो सकता। इस बयान ने दोनों देशों की चुनावी प्रणालियों की तुलना को फिर से चर्चा में ला दिया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि भारतीय चुनाव आयोग के प्रमुख ने अमेरिका में मतदाता पहचान पत्र की अनुपस्थिति पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा कि भारत में 1993 में तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन के कार्यकाल में मतदाता पहचान पत्र की व्यवस्था शुरू की गई थी, जिससे चुनावी धांधली पर काफी हद तक रोक लगी। ट्रंप का तर्क है कि अमेरिका में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू होने से चुनावी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनेगी। इस बीच, भारत की विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने ट्रंप की टिप्पणी पर तंज कसा है। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि अगर ट्रंप भारतीय चुनाव प्रणाली से इतने प्रभावित हैं, तो उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को अमेरिका ले जाकर वहां की चुनावी व्यवस्था में सुधार करवाना चाहिए। इस व्यंग्यात्मक टिप्पणी ने भारतीय राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। वहीं, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान अमेरिका में चुनावी सुधारों के लिए उनके अभियान का हिस्सा है, जिसमें वे गैर-नागरिकों के मतदान को रोकने के लिए नागरिकता प्रमाण को अनिवार्य बनाना चाहते हैं। भारत की चुनावी प्रणाली की वैश्विक स्तर पर सराहना होती रही है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में लगभग 97 करोड़ मतदाताओं के लिए मतदाता पहचान पत्र की व्यवस्था एक मिसाल है। चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, पारदर्शी प्रक्रिया और तकनीकी नवाचार ने भारतीय चुनावों को विश्वसनीय बनाया है। ट्रंप द्वारा इसका उल्लेख करना भारतीय लोकतंत्र की मजबूती को दर्शाता है, साथ ही यह भी दिखाता है कि कैसे विकसित देश भी विकासशील देशों की अच्छी प्रथाओं से सीख ले सकते हैं। निष्कर्ष के तौर पर, ट्रंप का यह बयान जहां एक ओर भारतीय चुनावी प्रणाली की वैश्विक स्वीकार्यता को रेखांकित करता है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका में चुनावी सुधारों की आवश्यकता पर भी बल देता है। 'सेव अमेरिका एक्ट' के समर्थन में भारत का उदाहरण देना ट्रंप की रणनीति का हिस्सा हो सकता है, लेकिन यह भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता का प्रमाण भी है। भविष्य में देखना होगा कि अमेरिकी कांग्रेस इस विधेयक पर क्या रुख अपनाती है और क्या भारत की तर्ज पर वहां मतदाता पहचान पत्र अनिवार्य हो पाता है।