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Breaking News: झारखंड में छात्र आंदोलन की बड़ी जीत: राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बाद हेमंत सोरेन सरकार ने रद्द कीं विवादित परीक्षाएं, सीबीआई जांच की मांग पर अड़े प्रदर्शनकारी
🕒 3 weeks ago

झारखंड में लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन ने एक निर्णायक मोड़ ले लिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के सीधे हस्तक्षेप के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने विवादित जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को रद्द करने की घोषणा की है। इतना ही नहीं, सरकार ने वर्ष 2014 से अब तक आयोजित सभी दागदार नौकरी परीक्षाओं, जिनमें जेएसएससी-सीजीएल और टीडीपीएल परीक्षाएं शामिल हैं, को भी निरस्त कर दिया है। इस कदम को छात्र नेताओं ने 'झारखंड के लिए बड़ी जीत' करार दिया है, जिसके बाद छात्र नेता महतो ने अपना 16 दिनों से चल रहा आमरण अनशन समाप्त कर दिया। आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आग्रह किया था कि वे प्रदर्शनकारी छात्रों से मिलकर उनकी समस्याओं का समाधान करें। इस अपील के तुरंत बाद सरकार हरकत में आई और मंत्रिमंडल की बैठक में विवादित परीक्षाओं को रद्द करने का बड़ा फैसला लिया गया। मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों की शिकायतें मिल रही थीं, जिसके चलते युवाओं का भरोसा टूट रहा था। सरकार के इस फैसले से लाखों अभ्यर्थियों को राहत मिली है, जो वर्षों से पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की मांग कर रहे थे। हालांकि, सरकार की इस बड़ी रियायत के बावजूद प्रदर्शनकारी छात्रों का एक गुट अभी भी आंदोलन जारी रखे हुए है। उनकी प्रमुख मांग है कि इन परीक्षा घोटालों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराई जाए। छात्रों का तर्क है कि केवल परीक्षा रद्द करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि दोषी अधिकारियों और नेताओं पर कार्रवाई के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने छात्रों की मुख्य मांग मान ली है, लेकिन प्रदर्शनकारी सीबीआई जांच की मांग पर अडिग हैं, जिससे गतिरोध बना हुआ है। इस पूरे घटनाक्रम ने झारखंड की राजनीति में युवा शक्ति की आवाज को बुलंद किया है। जहां एक ओर विपक्ष इसे अपनी जीत बता रहा है, वहीं सत्ताधारी दल इसे संवेदनशील सरकार का प्रमाण बता रहा है। छात्र नेता महतो के अनशन समाप्त करने से आंदोलन का एक चरण पूरा हुआ है, लेकिन सीबीआई जांच की मांग पूरी होने तक आंदोलन के जारी रहने की संभावना है। आने वाले दिनों में सरकार का रुख और छात्रों की रणनीति तय करेगी कि यह आंदोलन किस दिशा में जाता है। निष्कर्षतः, झारखंड सरकार का विवादित परीक्षाओं को रद्द करना एक ऐतिहासिक कदम है, जिसने छात्रों के विश्वास को बहाल करने का प्रयास किया है। लेकिन सीबीआई जांच की मांग पर अड़े प्रदर्शनकारी यह स्पष्ट कर रहे हैं कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई अभी अधूरी है। सरकार को चाहिए कि वह छात्रों की इस जायज मांग पर गंभीरता से विचार करे, ताकि भविष्य में भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके और युवाओं का सपना टूटने न पाए।

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✍️ By Pradeep Yadav | 18 Aug 2026