📰 Kotputli News
Breaking News: झारखंड में JSSC-CGL परीक्षा रद्द, छात्रों का आंदोलन जारी, CBI जांच की मांग पर अड़े प्रदर्शनकारी
🕒 3 weeks ago

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक बड़ा फैसला लेते हुए झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (CGL) परीक्षा को रद्द करने की घोषणा की है। इसके साथ ही वर्ष 2014 के बाद से आयोजित सभी JSSC-CGL और तृतीय-चतुर्थ श्रेणी (TDPL) परीक्षाओं को भी निरस्त कर दिया गया है। यह निर्णय पिछले कई दिनों से राजधानी रांची समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों में चल रहे छात्रों के उग्र आंदोलन और पेपर लीक के गंभीर आरोपों के बाद लिया गया है। सरकार के इस कदम को छात्रों की एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन आंदोलनकारी छात्र अभी भी संतुष्ट नहीं हैं और उनकी मुख्य मांग CBI जांच पर अड़ी हुई है। पिछले कई दिनों से झारखंड के बेरोजगार युवा और छात्र संगठन JSSC की परीक्षाओं में हुई कथित धांधली और पेपर लीक के विरोध में सड़कों पर उतरे हुए थे। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व में चला 16 दिनों का आमरण अनशन शुक्रवार को सरकार द्वारा मांगें माने जाने के बाद समाप्त हुआ। सरकार ने परीक्षा रद्द करने के साथ ही दोबारा परीक्षा आयोजित करने, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने और छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने जैसे प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया है। हालांकि, छात्रों का एक बड़ा वर्ग और विपक्षी दल इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग पर अड़े हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि राज्य सरकार की एजेंसियों द्वारा जांच में लीपापोती की आशंका बनी रहती है, इसलिए इस घोटाले की तह तक जाने के लिए CBI जांच अनिवार्य है। NDTV और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार द्वारा प्रमुख मांगें माने जाने के बावजूद छात्र संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक CBI जांच की अधिसूचना जारी नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा। द हिंदू की रिपोर्ट में भी इस बात को रेखांकित किया गया है कि छात्रों को सरकारी जांच तंत्र पर भरोसा नहीं है और वे स्वतंत्र जांच एजेंसी की मांग को लेकर दृढ़ संकल्पित हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने झारखंड की भर्ती प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को उजागर कर दिया है। विपक्षी दल भाजपा ने इसे सरकार की विफलता बताते हुए CBI जांच की मांग का समर्थन किया है। वहीं, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों के हित में फैसला लेने की बात कहते हुए युवाओं के भविष्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। जानकारों का मानना है कि परीक्षा रद्द करना एक तात्कालिक राहत है, लेकिन व्यवस्थागत सुधार और दोषियों को सजा दिए बिना युवाओं का विश्वास जीतना मुश्किल होगा। अब सबकी निगाहें राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या वह CBI जांच की सिफारिश करेगी या फिर राज्य स्तरीय जांच कमेटी गठित कर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास करेगी। छात्रों का यह आंदोलन झारखंड के लाखों बेरोजगार युवाओं की आशाओं और आक्रोश का प्रतीक बन चुका है। आने वाले दिनों में सरकार का रुख तय करेगा कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण समाधान की ओर बढ़ता है या फिर टकराव की स्थिति पैदा होती है। एक बात स्पष्ट है कि झारखंड के युवाओं ने अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता और एकजुटता का परिचय दिया है, जिसकी गूंज लंबे समय तक राज्य की राजनीति और प्रशासन में सुनाई देगी।

Stay connected with Kotputli News for latest updates.


📲 Share on WhatsApp
✍️ By Pradeep Yadav | 18 Aug 2026