अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान परमाणु समझौते को लेकर जारी गतिरोध के बीच ओमान को सीधी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि वह होरमुज जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न करता है तो अमेरिका उस पर भीषण बमबारी करेगा। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बेहद आक्रामक लहजे में लिखते हुए ओमान को चेताया कि वह ईरान के साथ चल रहे तनाव में 'रास्ते का रोड़ा' न बने। इस बयान ने खाड़ी क्षेत्र में पहले से जारी भूराजनीतिक तनाव को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की यह धमकी अमेरिका की 'अधिकतम दबाव' की नीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य ईरान को वार्ता की मेज पर झुकने के लिए मजबूर करना है। होरमुज जलडमरूमध्य विश्व की तेल आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है, जहां से प्रतिदिन लाखों बैरल कच्चा तेल गुजरता है। ओमान इस जलडमरूमध्य के दक्षिणी किनारे पर स्थित एक रणनीतिक देश है और लंबे समय से क्षेत्रीय मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। ओमान ने पूर्व में ईरान और पश्चिमी देशों के बीच गुप्त वार्ताओं की मेजबानी की है। ट्रंप का ताजा बयान उस रिपोर्ट के बाद आया है जिसमें दावा किया गया था कि ओमान ईरान को परमाणु समझौते के लिए मनाने के वास्ते एक नए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर काम कर रहा है। ट्रंप ने इस प्रक्रिया को खारिज करते हुए ईरान से 'बिना शर्त आत्मसमर्पण' की मांग की है और स्पष्ट किया है कि किसी भी देश को इस राह में बाधा बनने की इजाजत नहीं दी जाएगी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने ट्रंप के इस बयान पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ के राजनयिकों ने सभी पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक रास्ता अपनाने की अपील की है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने ट्रंप की धमकी को 'अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन' और 'क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा' करार दिया है। वहीं, ओमान ने अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन सूत्रों के अनुसार मस्कट अपनी तटस्थ मध्यस्थ की भूमिका बनाए रखने पर जोर दे रहा है। सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि होरमुज जलडमरूमध्य में किसी भी सैन्य टकराव का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर विनाशकारी असर पड़ेगा, क्योंकि इससे तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित होगी। इस बीच, अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा दी है। विमानवाहक पोतों और लड़ाकू विमानों की तैनाती को लेकर जारी रिपोर्टों ने युद्ध की आशंकाओं को बल दिया है। हालांकि, व्हाइट हाउस के कुछ अधिकारी ट्रंप के बयान को 'राजनीतिक बयानबाजी' बता रहे हैं, लेकिन ईरान ने अपने मिसाइल रक्षा प्रणालियों को हाई अलर्ट पर रख दिया है। खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के देशों सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन और कुवैत ने आपात बैठक बुलाकर क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा की है। इन देशों को डर है कि किसी भी संघर्ष का खामियाजा उनकी अर्थव्यवस्थाओं और नागरिक आबादी को भुगतना पड़ेगा। निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि ट्रंप की ओमान को दी गई खुली धमकी ने मध्य पूर्व के पहले से नाजुक शक्ति संतुलन को हिलाकर रख दिया है। जहां एक ओर अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने के लिए हर संभव दबाव बनाने की रणनीति पर चल रहा है, वहीं ईरान अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय प्रभाव को छोड़ने को तैयार नहीं दिखता। ओमान जैसे मध्यस्थ देशों के लिए यह स्थिति बेहद जटिल है, क्योंकि उन्हें दोनों पक्षों के साथ संबंध बनाए रखने हैं। आने वाले दिनों में होरमुज जलडमरूमध्य की स्थिति वैश्विक कूटनीति और ऊर्जा बाजारों की दिशा तय करेगी। दुनिया उम्मीद कर रही है कि विवाद का हल बातचीत से निकलेगा, न कि बमबारी से।