रूस और यूक्रेन के बीच जारी भीषण युद्ध अब अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक हितों को भी अपनी चपेट में ले रहा है। ताजा घटनाक्रम में रूसी मिसाइलों ने यूक्रेन के क्रिवी रिह शहर में स्थित आर्सेलरमित्तल के विशाल इस्पात संयंत्र पर हमला किया है। यह संयंत्र भारतीय मूल के ब्रिटिश अरबपति लक्ष्मी मित्तल के स्वामित्व वाली विश्व की सबसे बड़ी इस्पात कंपनी आर्सेलरमित्तल का हिस्सा है। इस हमले ने युद्ध के आर्थिक आयाम को एक नई दिशा दे दी है, जहां वैश्विक उद्योगपतियों की संपत्तियां भी सुरक्षित नहीं रह गई हैं। स्थानीय अधिकारियों और कंपनी के बयानों के अनुसार, इस भीषण मिसाइल हमले में कम से कम दो कर्मचारियों की मौत हो गई है, जबकि एक दर्जन से अधिक लोग घायल हुए हैं। यूक्रेन के अधिकारियों ने बताया कि रूसी सेना ने हाल के दिनों में अपने हवाई हमलों की तीव्रता बढ़ा दी है और औद्योगिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा रहा है। क्रिवी रिह स्थित यह प्लांट यूक्रेन की अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ की हड्डी माना जाता है और देश के इस्पात उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा यहीं से आता है। आर्सेलरमित्तल ने एक बयान जारी कर हमले की पुष्टि की और कहा कि संयंत्र के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। कंपनी ने अपने कर्मचारियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि वे स्थिति का आकलन कर रहे हैं और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान करेंगे। इस घटना ने वैश्विक इस्पात आपूर्ति श्रृंखला पर भी संकट के बादल मंडरा दिए हैं। इस हमले के समय रूस ने यूक्रेन के ऊर्जा क्षेत्र और रक्षा उद्योग से जुड़े ठिकानों पर बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। खबरों के मुताबिक, एक ही रात में रूस ने यूक्रेन पर 600 से अधिक ड्रोन दागे, जिसे युद्ध की शुरुआत से अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला माना जा रहा है। वहीं, यूक्रेन ने भी पलटवार करते हुए मॉस्को क्षेत्र पर ड्रोन हमले किए, जिससे रूसी राजधानी के हवाई अड्डों पर उड़ानें कुछ समय के लिए बाधित रहीं। इस पारस्परिक विनाश की होड़ में नागरिक बुनियादी ढांचे और औद्योगिक प्रतिष्ठानों का निशाना बनाया जाना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का घोर उल्लंघन है, जिसकी वैश्विक स्तर पर निंदा हो रही है। भारतीय दृष्टिकोण से देखें तो यह घटना बेहद चिंताजनक है क्योंकि इससे एक प्रमुख भारतीय व्यवसायी के वैश्विक हित सीधे प्रभावित हुए हैं। लक्ष्मी मित्तल की कंपनी आर्सेलरमित्तल का यूक्रेन में भारी निवेश है और यह संयंत्र वहां का सबसे बड़ा निजी निवेशक और करदाता है। भारत सरकार ने अब तक इस विशिष्ट घटना पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन युद्ध क्षेत्र में भारतीय संपत्तियों और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। यह घटना दर्शाती है कि आधुनिक युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था और बहुराष्ट्रीय निगमों को भी अस्थिर कर रहा है। अंत में, इस ताजा हमले ने रूस-यूक्रेन युद्ध के लंबा खिंचने और इसके वैश्विक परिणामों की भयावह तस्वीर पेश की है। जहां एक ओर मानवीय क्षति लगातार बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर औद्योगिक विनाश से वैश्विक मंदी और आपूर्ति संकट का खतरा गहरा रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को युद्धविराम और शांति वार्ता के लिए दबाव बढ़ाना होगा, अन्यथा इस तरह के हमले आम नागरिकों और वैश्विक आर्थिक स्थिरता दोनों के लिए विनाशकारी साबित होंगे। आर्सेलरमित्तल प्लांट पर हुआ हमला इस बात का स्पष्ट संकेत है कि युद्ध की आंच अब किसी भी सीमा और व्यावसायिक हित को नहीं बख्श रही।