भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और प्रमुख नेता शहजाद पूनावाला ने मंगलवार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। पूनावाला ने अपने त्यागपत्र में "दबावपूर्ण वित्तीय और निजी परिस्थितियों" को मुख्य कारण बताते हुए पार्टी नेतृत्व से तत्काल प्रभाव से उन्हें मुक्त करने का अनुरोध किया है। यह दूसरा मौका है जब पूनावाला ने भाजपा छोड़ने का फैसला किया है, इससे पहले भी उन्होंने एक बार इस्तीफा दिया था जिसे पार्टी नेतृत्व ने अस्वीकार कर दिया था। पूनावाला ने पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा को संबोधित अपने दूसरे त्यागपत्र में लिखा है कि वह पार्टी से "हार्दिक विदाई" ले रहे हैं और पार्टी के प्रति अपने प्रेम और सम्मान को दोहराते हुए कहा कि व्यक्तिगत और वित्तीय दबावों के कारण वह सक्रिय राजनीति जारी रखने में असमर्थ हैं। उन्होंने पार्टी नेतृत्व से अनुरोध किया कि उनके इस्तीफे को तुरंत स्वीकार किया जाए ताकि वे अपनी निजी जिम्मेदारियों पर ध्यान केंद्रित कर सकें। सूत्रों के अनुसार, पूनावाला पर कर्ज और पारिवारिक जिम्मेदारियों का काफी दबाव था। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने पूनावाला के इस फैसले पर हैरानी जताई है। पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पूनावाला पार्टी के मुखर प्रवक्ता थे और टेलीविजन बहसों में पार्टी का पक्ष मजबूती से रखते थे। उनके अचानक लिए गए इस फैसले से पार्टी की मीडिया टीम को झटका लगा है। हालांकि, पार्टी नेतृत्व ने अभी तक औपचारिक रूप से उनके इस्तीफे पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन माना जा रहा है कि इस बार उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाएगा। शहजाद पूनावाला कांग्रेस पृष्ठभूमि से आते हैं और उनके भाई तहसीन पूनावाला भी राजनीतिक विश्लेषक हैं। शहजाद 2019 में भाजपा में शामिल हुए थे और जल्द ही पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता बना दिए गए। उन्होंने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर पार्टी का बचाव किया और विपक्षी दलों पर तीखे हमले किए। उनके इस्तीफे को भाजपा की मीडिया रणनीति के लिए एक बड़ा नुकसान माना जा रहा है, विशेषकर ऐसे समय में जब लोकसभा चुनाव नजदीक हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पूनावाला का इस्तीफा व्यक्तिगत कारणों से अधिक राजनीतिक असहजता का परिणाम हो सकता है। कुछ जानकारों का कहना है कि पार्टी के भीतर उनकी भूमिका को लेकर स्पष्टता नहीं थी और हाल के महीनों में उन्हें प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म पर कम देखा जा रहा था। बहरहाल, भाजपा नेतृत्व अब उनकी जगह नए प्रवक्ता की तलाश में जुट गया है। पूनावाला के भविष्य के राजनीतिक कदम पर भी सबकी नजर रहेगी, हालांकि उन्होंने फिलहाल सक्रिय राजनीति से दूर रहने के संकेत दिए हैं।