बिहार के लखीसराय जिले में स्थित प्रसिद्ध अशोक धाम मंदिर में सोमवार को श्रावण मास के दौरान जलाभिषेक के लिए उमड़ी भारी भीड़ के बीच भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई, जिसमें कम से कम छह श्रद्धालुओं की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। यह घटना सुबह उस समय हुई जब हजारों की संख्या में कांवड़िए और शिवभक्त भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए मंदिर परिसर में प्रवेश करने का प्रयास कर रहे थे। अचानक भीड़ बेकाबू हो गई और लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरने लगे, जिससे दम घुटने और कुचले जाने से यह दर्दनाक हादसा हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय प्रशासन के अनुसार, मंदिर के मुख्य द्वार पर श्रद्धालुओं की कतार बहुत लंबी थी और धक्का-मुक्की के बीच कुछ लोग गिर पड़े, जिसके बाद पीछे से आ रही भीड़ उन्हें रौंदते हुए आगे बढ़ गई। घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और पुलिस बल तुरंत मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को आनन-फानन में नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। लखीसराय के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने घटनास्थल का निरीक्षण कर स्थिति को नियंत्रण में लेने का दावा किया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस हृदयविदारक घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। साथ ही उन्होंने घायलों के समुचित इलाज की व्यवस्था करने और घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मंदिरों में भीड़ प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे। विपक्षी दलों ने भी घटना पर दुख जताते हुए प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाया है और बेहतर व्यवस्था की मांग की है। श्रावण मास में बिहार के विभिन्न शिव मंदिरों में लाखों की संख्या में कांवड़िए जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। अशोक धाम मंदिर भी ऐसा ही एक प्रमुख तीर्थस्थल है जहां हर साल भारी भीड़ उमड़ती है। पिछले वर्षों में भी भीड़ नियंत्रण में कमी के चलते छोटी-मोटी घटनाएं सामने आती रही हैं, लेकिन इस बार की घटना ने सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मंदिर परिसर की क्षमता से कई गुना अधिक भीड़ जमा होने और प्रवेश-निकास के संकरे रास्ते ही इस त्रासदी का मुख्य कारण बने। इस दुखद घटना ने एक बार फिर धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। प्रशासन को भविष्य के लिए सबक लेते हुए श्रावण मास जैसे अवसरों पर पूर्व नियोजित योजना, पर्याप्त पुलिस बल, बैरिकेडिंग, चिकित्सा शिविर और आपातकालीन निकास मार्गों की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। मृतकों की आत्मा की शांति और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना के साथ यह अपेक्षा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी और ऐसी व्यवस्था बनेगी कि आस्था के नाम पर फिर किसी की जान न जाए।