झारखंड की राजधानी रांची में JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन मंगलवार को उस समय उग्र हो गया जब सैकड़ों अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के पुतले जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सीएम आवास घेराव की चेतावनी देते हुए सरकार पर परीक्षा प्रणाली में धांधली और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। इस दौरान एक प्रदर्शनकारी ने अपना सिर मुंडवाकर मुख्यमंत्री और राहुल गांधी के 'अंतिम संस्कार' की प्रतीकात्मक क्रिया तक कर डाली, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया। परीक्षा अभ्यर्थियों का आरोप है कि JPSC और JSSC की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं बरती गई हैं, जिससे योग्य उम्मीदवारों का चयन नहीं हो पा रहा है। छात्र लंबे समय से परीक्षा रद्द कर नए सिरे से पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार उनकी जायज मांगों को अनसुना कर रही है, जिसके चलते उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने तेजस्वी यादव पर भी निशाना साधा, क्योंकि बिहार में भी इसी तरह के परीक्षा विवाद सामने आए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए झारखंड सरकार ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए प्रदर्शनकारी छात्र प्रतिनिधियों को सोमवार को चौथे दौर की वार्ता के लिए आमंत्रित किया है। सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्वयं इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए प्रतिबद्ध हैं। इससे पहले तीन दौर की वार्ता बेनतीजा रही थी, लेकिन सरकार का दावा है कि इस बार ठोस समाधान निकाला जाएगा। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने 'नौकरी दो या डिग्री वापस लो' जैसे नारे लगाते हुए विधानसभा मार्च भी निकाला। पुलिस ने एहतियातन भारी सुरक्षा व्यवस्था की थी, लेकिन प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखते रहे। एक छात्र नेता ने कहा, "हमारे सब्र का बांध टूट चुका है। सरकार अगर हमारी मांगें नहीं मानती तो हम अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे।" वहीं, विपक्षी दल भाजपा ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए इसे युवाओं के साथ विश्वासघात बताया है। फिलहाल सभी निगाहें सोमवार को होने वाली चौथे दौर की वार्ता पर टिकी हैं। यदि इस बैठक में कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलता तो आंदोलन और उग्र होने की आशंका है। सरकार के सामने चुनौती है कि वह परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल करे और युवाओं का विश्वास जीते। इस पूरे प्रकरण ने झारखंड की शिक्षा व्यवस्था और रोजगार नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका समाधान अब अनिवार्य हो गया है।