झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर अभ्यर्थियों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार को प्रदर्शन के 23वें दिन राजधानी रांची में सैकड़ों अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के पुतले जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे सोमवार को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे। एक अभ्यर्थी ने तो मुख्यमंत्री और राहुल गांधी के 'अंतिम संस्कार' के प्रतीक स्वरूप अपना सिर भी मुंडवा लिया, जिससे आंदोलन की गंभीरता स्पष्ट होती है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि जेपीएससी की सातवीं से दसवीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा और जेएसएससी की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है। वे परीक्षाओं को रद्द कर सीबीआई जांच कराने, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने और पारदर्शी तरीके से पुनः परीक्षा आयोजित करने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पिछले 23 दिनों से वे शांतिपूर्ण तरीके से धरना दे रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं। शनिवार को सरकार ने चौथे दौर की वार्ता का प्रस्ताव रखा था, लेकिन अभ्यर्थियों ने इसे ठुकरा दिया और आंदोलन तेज करने का ऐलान किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने रविवार देर शाम एक बार फिर अभ्यर्थियों को सोमवार को वार्ता के लिए आमंत्रित किया है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि वह छात्रों की चिंताओं को समझती है और समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, अभ्यर्थियों के नेताओं का कहना है कि जब तक ठोस लिखित आश्वासन नहीं मिलता, वे वार्ता के लिए नहीं जाएंगे। द हिंदू के अनुसार, सरकार पर दबाव बढ़ रहा है क्योंकि विपक्षी दल भी अभ्यर्थियों के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं। इस पूरे प्रकरण ने झारखंड की राजनीति को गरमा दिया है। भाजपा ने सरकार पर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है, वहीं सत्ताधारी गठबंधन इसे विपक्ष की साजिश बता रहा है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों ने भी परीक्षा प्रणाली में सुधार की वकालत की है। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि यह केवल उनकी लड़ाई नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य की लड़ाई है। वे पीछे हटने को तैयार नहीं हैं, चाहे इसके लिए उन्हें कितना भी लंबा संघर्ष करना पड़े। अब सबकी निगाहें सोमवार की वार्ता पर टिकी हैं। यदि सरकार ठोस कदम उठाने का लिखित आश्वासन देती है, तो आंदोलन समाप्त हो सकता है, अन्यथा मुख्यमंत्री आवास घेराव से हालात बिगड़ सकते हैं। प्रशासन ने एहतियातन सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और धारा 144 लागू करने पर विचार कर रहा है। यह आंदोलन झारखंड की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगा चुका है, और इसका हल निकलना न केवल अभ्यर्थियों बल्कि पूरे राज्य के हित में आवश्यक है।