राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी से सार्वजनिक माफी की मांग उठाई है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कथित तौर पर 'वंदे मातरम' के अपमान को लेकर पैदा हुए विवाद ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। बंकिम चंद्र के परपोते ने एक बयान जारी कर कहा है कि कांग्रेस नेतृत्व ने जानबूझकर राष्ट्रीय गीत का अनादर किया है, जिससे करोड़ों देशवासियों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने इस मामले में सोनिया गांधी से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की है। इस विवाद की पृष्ठभूमि में हाल ही में संपन्न स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान कांग्रेस के कुछ नेताओं द्वारा 'वंदे मातरम' गाने से इनकार करने या उसके प्रति असम्मान दिखाने के आरोप लगे हैं। बंकिम चंद्र के वंशज ने इसे राष्ट्रीय अस्मिता पर हमला बताते हुए कहा कि 'वंदे मातरम' केवल एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा और देशभक्ति का प्रतीक है। उन्होंने कांग्रेस पर इतिहास को विकृत करने और राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान करने की परंपरा जारी रखने का आरोप लगाया। इस मांग को सोशल मीडिया पर भी व्यापक समर्थन मिल रहा है। मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि 'देश वंदे मातरम का अपमान कभी माफ नहीं करेगा' और यह कांग्रेस की नीति रही है कि वह हर देशभक्तिपूर्ण प्रतीक का विरोध करती है। भाजपा प्रवक्ताओं ने भी इसे कांग्रेस की 'राष्ट्रविरोधी मानसिकता' का प्रमाण बताते हुए कहा कि पार्टी स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। भाजपा ने मांग की है कि कांग्रेस इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करे और देश से माफी मांगे। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब देश में राष्ट्रीय प्रतीकों और इतिहास को लेकर बहस तेज है। बंकिम चंद्र के वंशज की मांग ने इस मुद्दे को भावनात्मक और सांस्कृतिक आयाम दे दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आगामी चुनावों में राष्ट्रवाद के मुद्दे को और धार दे सकता है। कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन पार्टी के अंदरखाने इस मुद्दे पर डैमेज कंट्रोल की कवायद शुरू हो गई है। अंततः यह विवाद राष्ट्रीय गीत के सम्मान और राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।