बांग्लादेश ने स्पष्ट कर दिया है कि कार्यवाहक प्रधानमंत्री तारिक रहमान की प्रस्तावित भारत यात्रा तब तक नहीं होगी जब तक पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का प्रत्यर्पण नहीं हो जाता। ढाका ने नई दिल्ली के समक्ष 'अनुकूल माहौल' बनाने की शर्त रखी है, जिससे द्विपक्षीय संबंधों में नया मोड़ आ गया है। 'द हिंदू', 'एनडीटीवी', 'इंडियन एक्सप्रेस' और 'इंडिया टुडे' सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने तारिक रहमान की नई दिल्ली यात्रा के लिए दो प्रमुख शर्तें रखी हैं। पहली और सबसे अहम शर्त शेख हसीना का प्रत्यर्पण है, जो अगस्त 2024 में छात्र-नेतृत्व वाले जनआंदोलन के बाद भारत में शरण लिए हुए हैं। दूसरी शर्त द्विपक्षीय संबंधों में 'सकारात्मक और अनुकूल वातावरण' बनाने से जुड़ी है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि जब तक ये शर्तें पूरी नहीं होतीं, उच्च स्तरीय यात्रा का कोई औचित्य नहीं रह जाता। वहीं, भारत सरकार का रुख है कि प्रत्यर्पण का फैसला न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालतें करेंगी। 'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर कूटनीतिक बातचीत जारी है और संबंधों की दिशा बदलने के प्रयास हो रहे हैं। भारत ने 1972 की प्रत्यर्पण संधि का हवाला देते हुए कहा कि वह कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करता है, लेकिन राजनीतिक शरणार्थियों के मामले में मानवीय पहलुओं पर भी विचार करता है। गौरतलब है कि शेख हसीना 15 अगस्त 2024 को बांग्लादेश छोड़कर भारत आई थीं, जब छात्र आंदोलन के चलते उनकी सरकार गिरी थी। तब से बांग्लादेश की अंतरिम सरकार, जिसका नेतृत्व नोबेल विजेता मुहम्मद यूनुस कर रहे हैं, हसीना पर मानवता के विरुद्ध अपराध, भ्रष्टाचार और धन शोधन के आरोप लगाते हुए उनका प्रत्यर्पण मांग रही है। तारिक रहमान, जो बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के वरिष्ठ नेता हैं और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के पुत्र हैं, लंबे समय से लंदन में निर्वासन में रह रहे थे और हाल ही में ढाका लौटे हैं। इस घटनाक्रम ने दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में जटिलता बढ़ा दी है। भारत के लिए बांग्लादेश रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पड़ोसी है, लेकिन घरेलू राजनीतिक दबाव और अंतरराष्ट्रीय कानूनी बाध्यताओं के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण होगा। विश्लेषकों का मानना है कि इस गतिरोध का समाधान कूटनीतिक संवाद और कानूनी प्रक्रिया के सम्मान से ही संभव है, अन्यथा द्विपक्षीय संबंधों पर दीर्घकालिक असर पड़ सकता है।