केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के राजस्थान के अलवर दौरे से पहले सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कई छात्रों और कांग्रेस नेताओं को हिरासत में ले लिया। यह कार्रवाई उस समय की गई जब ये लोग सीजेपी (सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस) पर हुई हालिया कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन करने की योजना बना रहे थे। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि गृह मंत्री अमित शाह इस पूरे प्रकरण की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दें। अलवर में प्रस्तावित डेयरी फाउंडेशन के कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे गृह मंत्री के आगमन से घंटों पहले ही पुलिस ने एहतियातन गिरफ्तारियां शुरू कर दीं, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बन गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, हिरासत में लिए गए छात्र और कांग्रेस कार्यकर्ता सीजेपी से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं और संस्थाओं पर केंद्रीय एजेंसियों की छापेमारी और कार्रवाई का विरोध कर रहे थे। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर असहमति की आवाज को दबाने का काम कर रही है। प्रदर्शनकारियों ने घोषणा की थी कि वे अमित शाह के अलवर पहुंचने पर काले झंडे दिखाएंगे और सभास्थल के निकट धरना देंगे। इस सूचना के बाद हरकत में आई पुलिस ने देर रात और सुबह तड़के कई ठिकानों पर दबिश देकर आयोजकों को उठा लिया। हिंदुस्तान टाइम्स और द हिंदू की रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया एहतियाती कदम बताया है। अलवर में गृह मंत्री का मुख्य कार्यक्रम राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन से जुड़ी 6,262 करोड़ रुपये की योजनाओं के शिलान्यास और लोकार्पण का था। इस बड़े सरकारी आयोजन की गरिमा बनी रहे, इसके लिए प्रशासन ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए थे। सभास्थल के चारों ओर बहुस्तरीय घेरा बनाया गया था और प्रवेश द्वारों पर सघन जांच की जा रही थी। कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी पर पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे लोकतंत्र का गला घोंटने वाला कदम करार दिया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने बयान जारी कर कहा कि शांतिपूर्ण विरोध करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन भाजपा सरकार पुलिस बल का इस्तेमाल कर इस अधिकार को कुचल रही है। दूसरी ओर, भाजपा और पुलिस प्रशासन ने गिरफ्तारियों को न्यायोचित ठहराते हुए कहा कि कुछ तत्व माहौल खराब करने की साजिश रच रहे थे। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को बिना वजह परेशान नहीं किया जा रहा है, केवल उन्हीं लोगों को हिरासत में लिया गया है जिनसे शांति भंग होने की आशंका थी। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, हिरासत में लिए गए नेताओं को कार्यक्रम समाप्त होने के बाद रिहा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान अलवर शहर में भारी पुलिस बल तैनात रहा और यातायात मार्गों में परिवर्तन किया गया, जिससे आम जनता को भी कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ा। कुल मिलाकर अमित शाह का अलवर दौरा जहां विकास योजनाओं की सौगात लेकर आया, वहीं विपक्ष की आवाज दबाने के आरोपों के कारण राजनीतिक सुर्खियों में भी छाया रहा। सीजेपी कार्रवाई को लेकर उपजे आक्रोश ने दर्शाया कि केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता अब जमीनी स्तर पर राजनीतिक टकराव का कारण बनती जा रही है। प्रशासन भले ही आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में कामयाब रहा हो, लेकिन एहतियातन गिरफ्तारियों की यह रणनीति आने वाले दिनों में राजस्थान की सियासत में नए विवाद को जन्म दे सकती है।