राष्ट्रगीत वंदे मातरम को लेकर एक बार फिर देश की राजनीति में उबाल आ गया है। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने वंदे मातरम के पूर्ण गायन का विरोध किया था। भाजपा ने इस मुद्दे पर सोनिया गांधी से सार्वजनिक माफी की मांग की है। वहीं, कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें भाजपा की सियासी चाल बताया है। यह विवाद उस समय सामने आया जब भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए कांग्रेस पर राष्ट्रगीत के अपमान का आरोप लगाया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस को इस बात पर शर्म आनी चाहिए। उन्होंने सोनिया गांधी पर सीधा निशाना साधते हुए राष्ट्रगीत के प्रति उनकी निष्ठा पर सवाल उठाए। इस विवाद में नया मोड़ तब आया जब वंदे मातरम के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज ने भी सोनिया गांधी से माफी की मांग की। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि सोनिया और राहुल गांधी ने वंदे मातरम का अपमान किया है, जिसके लिए उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए। भाजपा ने इसे राष्ट्रवाद बनाम परिवारवाद की लड़ाई करार दिया है। दूसरी तरफ, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पलटवार करते हुए भाजपा पर असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम के मुद्दे को बेवजह तूल दिया जा रहा है ताकि महंगाई, बेरोजगारी और संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग जैसे ज्वलंत सवालों पर पर्दा डाला जा सके। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि पार्टी का इतिहास राष्ट्रगीत के सम्मान से जुड़ा रहा है और भाजपा के आरोप निराधार तथा राजनीति से प्रेरित हैं। पार्टी प्रवक्ताओं ने ऐतिहासिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए भाजपा के दावों का खंडन किया। यह सियासी टकराव ऐसे समय में सामने आया है जब देश में चुनावी माहौल गरमाने लगा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा इस मुद्दे के जरिए अपने राष्ट्रवादी एजेंडे को धार देने का प्रयास कर रही है, जबकि कांग्रेस इसे भाजपा की हताशा बता रही है। दोनों दलों के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा ट्रेंड कर रहा है और आम जनता की प्रतिक्रियाएं विभाजित नजर आ रही हैं। निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि वंदे मातरम पर छिड़ा यह विवाद महज एक ऐतिहासिक बहस नहीं, बल्कि आगामी चुनावों के लिए जमीन तैयार करने की कवायद है। भाजपा जहां इसे अपनी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की पहचान से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस इसे संविधान और लोकतंत्र पर खतरे के रूप में पेश कर रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, जिसका असर राजनीतिक विमर्श पर पड़ना तय है।