महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने बॉलीवुड के तीन दिग्गज सितारों शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को कारण बताओ नोटिस जारी कर हलचल मचा दी है। यह कार्रवाई मशहूर पान मसाला ब्रांड 'विमल' के इलायची उत्पाद वाले विज्ञापन को लेकर की गई है। एफडीए के आयुक्त तुकाराम मुंढे के निर्देश पर जारी इस नोटिस में तीनों अभिनेताओं से 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है कि उन्होंने सरोगेट विज्ञापन के जरिए तंबाकू उत्पाद को बढ़ावा क्यों दिया। इस कदम को तंबाकू नियंत्रण कानूनों के सख्त प्रवर्तन की दिशा में एक बड़ी पहल माना जा रहा है। एफडीए का आरोप है कि 'विमल इलायची' के नाम पर प्रसारित किए जा रहे विज्ञापन वास्तव में 'विमल' ब्रांड के मुख्य तंबाकू उत्पाद पान मसाला और गुटखा का सरोगेट विज्ञापन हैं। सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (कोटपा) 2003 के तहत तंबाकू उत्पादों के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष विज्ञापन पर पूर्ण प्रतिबंध है। इसके बावजूद बड़ी कंपनियां इलायची, सौंफ या अन्य उत्पादों की आड़ में अपने मुख्य ब्रांड नाम को प्रचारित करती रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे विज्ञापनों में ब्रांड का नाम, लोगो और रंग योजना वही रखी जाती है जो मुख्य तंबाकू उत्पाद की होती है, जिससे उपभोक्ता भ्रमित होते हैं और ब्रांड रिकॉल तंबाकू उत्पाद के लिए ही होता है। नोटिस मिलने के बाद तीनों अभिनेताओं के पास कानूनी रूप से अपना पक्ष रखने के लिए दो सप्ताह का समय है। यदि उनके जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाते हैं तो एफडीए उनके खिलाफ कोटपा अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू कर सकती है, जिसमें जुर्माने के साथ-साथ कारावास का प्रावधान भी है। गौरतलब है कि इससे पहले भी कई सेलिब्रिटीज तंबाकू और पान मसाला ब्रांडों के विज्ञापन करने पर आलोचना का शिकार होते रहे हैं, लेकिन पहली बार किसी राज्य के एफडीए आयुक्त स्तर के अधिकारी ने इतनी सख्ती से सीधे सितारों को नोटिस थमाया है। तुकाराम मुंढे अपनी सख्त प्रशासनिक छवि के लिए जाने जाते हैं और उनके इस कदम की सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा सराहना की जा रही है। इस घटनाक्रम ने फिल्म उद्योग और विज्ञापन जगत में एक बहस छेड़ दी है कि क्या मशहूर हस्तियों को सामाजिक जिम्मेदारी समझते हुए ऐसे ब्रांड्स का प्रचार करना चाहिए जो अप्रत्यक्ष रूप से नशे को बढ़ावा देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि युवा पीढ़ी पर इन सितारों का गहरा प्रभाव होता है और उनके द्वारा किए गए विज्ञापन तंबाकू सेवन को सामान्य बनाने का काम करते हैं। अब सबकी निगाहें तीनों अभिनेताओं के जवाब और एफडीए की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं। यह मामला भविष्य में सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट के लिए एक नजीर बन सकता है, जिससे कंपनियों और सितारों दोनों को अपने करारों की समीक्षा करनी पड़ सकती है।