पश्चिम बंगाल की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई जब तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष आशीष बनर्जी का शव पार्टी कार्यालय में रहस्यमयी परिस्थितियों में पाया गया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाने वाले आशीष बनर्जी का निधन राज्य की राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक रिपोर्ट्स के अनुसार, उनका शव फंदे से लटका मिला है, जिससे आत्महत्या की आशंका जताई जा रही है, हालांकि पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है। आशीष बनर्जी बीरभूम जिले के सैंथिया विधानसभा क्षेत्र से कई बार विधायक रहे और लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस के विश्वस्त सहयोगी के रूप में काम किया। वे विधानसभा के उपाध्यक्ष पद पर भी आसीन रहे, जहां उनकी निष्पक्षता और संसदीय ज्ञान की सराहना होती थी। पार्टी सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से वे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे, लेकिन उनकी अचानक मौत ने सभी को स्तब्ध कर दिया है। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें पार्टी का स्तंभ बताया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही फॉरेंसिक टीम और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए थे। कार्यालय के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और वहां मौजूद कर्मचारियों से पूछताछ जारी है। आशीष बनर्जी के परिवार वालों को भी सूचित कर दिया गया है। राजनीतिक गलियारों में इस घटना को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन पुलिस ने किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले वैज्ञानिक जांच पूरी करने की बात कही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने करीबी सहयोगी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि आशीष बनर्जी का जाना उनके लिए व्यक्तिगत क्षति है। उन्होंने पुलिस को निष्पक्ष और त्वरित जांच के निर्देश दिए हैं। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी समेत पार्टी के तमाम बड़े नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की है। विपक्षी दलों ने भी इस दुखद घटना पर संवेदना व्यक्त की है। इस घटना ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक खालीपन छोड़ दिया है। आशीष बनर्जी की पहचान एक कुशल प्रशासक, कर्मठ नेता और जनता के प्रति समर्पित जनप्रतिनिधि के रूप में थी। उनके निधन से न केवल तृणमूल कांग्रेस बल्कि पूरे बंगाल की राजनीति को गहरा आघात लगा है। जांच पूरी होने तक इस रहस्यमयी मौत की असली वजह सामने नहीं आ सकेगी, लेकिन उनके योगदान को बंगाल की जनता लंबे समय तक याद रखेगी।