ईरान और ओमान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होरमुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर एक अहम समझौते की दिशा में बातचीत तेज कर दी है। हाल के महीनों में इस व्यस्त समुद्री मार्ग पर व्यावसायिक जहाजों पर हुए सिलसिलेवार हमलों ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए गंभीर खतरा पैदा कर दिया है। दोनों खाड़ी देशों का यह संयुक्त प्रयास क्षेत्रीय स्थिरता कायम करने और समुद्री परिवहन को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। होरमुज जलडमरूमध्य से होकर विश्व की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति गुजरती है, जिससे इसकी सुरक्षा न केवल खाड़ी देशों बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ईरान और ओमान के बीच प्रस्तावित समझौते में संयुक्त गश्त, खुफिया जानकारी साझा करने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र स्थापित करने जैसे प्रावधान शामिल होने की संभावना है। ओमान, जो जलडमरूमध्य के अरब पक्ष पर स्थित है, लंबे समय से क्षेत्रीय तनाव कम करने में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है, जबकि ईरान का उत्तरी तट पर नियंत्रण है। पिछले कुछ वर्षों में टैंकरों पर रहस्यमय हमलों, ड्रोन हमलों और जहाजों को जब्त किए जाने की घटनाओं में वृद्धि ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। इन घटनाओं के लिए अक्सर ईरान समर्थित बलों को जिम्मेदार ठहराया जाता रहा है, हालांकि तेहरान इससे इनकार करता रहा है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने क्षेत्र में नौसैनिक उपस्थिति बढ़ाई है, लेकिन क्षेत्रीय देशों का मानना है कि स्थायी समाधान आपसी सहयोग से ही निकल सकता है। इस पृष्ठभूमि में ईरान-ओमान वार्ता को एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता मूर्त रूप लेता है तो यह खाड़ी में विश्वास निर्माण की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। इससे न केवल तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित होगी बल्कि क्षेत्र में तनाव कम करने का एक मॉडल भी प्रस्तुत करेगा। हालांकि, समझौते की सफलता दोनों देशों की राजनीतिक इच्छाशक्ति और बाहरी शक्तियों के हस्तक्षेप से मुक्त रहने पर निर्भर करेगी। आने वाले हफ्तों में वार्ता के नतीजे क्षेत्रीय भू-राजनीति की दिशा तय करेंगे।