अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हार्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव के बीच अमेरिकी नागरिकों से आग्रह किया है कि वे पेट्रोल के लिए 'थोड़ा अधिक' भुगतान करने को तैयार रहें। यह बयान ऐसे समय आया है जब फारस की खाड़ी में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं और अमेरिका ने यूएसएस लिंकन की जगह एक नए कैरियर समूह को पश्चिम एशिया भेजने का निर्णय लिया है। ट्रंप का यह रुख उनकी उस नीति का हिस्सा है जिसमें वे ईरान पर अधिकतम दबाव बनाए रखने की बात करते रहे हैं। हार्मुज जलडमरूमध्य विश्व के तेल व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है जहां से प्रतिदिन लगभग दो करोड़ बैरल कच्चे तेल का परिवहन होता है। ईरान ने बार-बार चेतावनी दी है कि यदि उसके तेल निर्यात को रोका गया तो वह इस सामरिक जलमार्ग को बंद कर देगा। हालिया घटनाक्रम में ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह जलडमरूमध्य में अपनी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा, जबकि ट्रंप ने यहां तक संकेत दिया है कि वे जल्द ही हार्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिकी क्षेत्र घोषित कर सकते हैं। इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार, यूएसएस लिंकन की जगह लेने के लिए एक नया कैरियर स्ट्राइक ग्रुप मध्य पूर्व की ओर रवाना हो चुका है। इस तैनाती का उद्देश्य क्षेत्र में अमेरिकी हितों और सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बताया गया है। हालांकि, सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की तैनाती से तनाव और बढ़ सकता है। ईरान ने इस सैन्य जमावड़े को भड़काऊ कदम बताते हुए कहा है कि वह अपनी जलसीमा की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा। पेट्रोल की बढ़ती कीमतों पर ट्रंप का रवैया जहां लापरवाही भरा दिख रहा है, वहीं उनके उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जेडी वेंस ने कम कीमतों को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है। इस विरोधाभास ने अमेरिकी घरेलू राजनीति में भी बहस छेड़ दी है। आम अमेरिकी नागरिक पहले से ही मुद्रास्फीति की मार झेल रहे हैं और पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि उनके बजट पर सीधा असर डालेगी। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि हार्मुज संकट लंबा खिंचता है तो वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल मच सकती है। निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि हार्मुज जलडमरूमध्य में जारी गतिरोध न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी गंभीर खतरा बनता जा रहा है। ट्रंप का बयान उनकी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति का परिचायक है, लेकिन इसके दीर्घकालिक परिणाम अनिश्चित हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चाहिए कि वह कूटनीतिक माध्यमों से इस संकट का शांतिपूर्ण समाधान निकाले, अन्यथा तेल आपूर्ति बाधित होने से पूरी दुनिया को आर्थिक झटका लग सकता है।