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Breaking News: स्वतंत्रता दिवस पर उमर अब्दुल्ला का बड़ा बयान: बोले- अनुच्छेद 370 न हटता तो PoK भी जम्मू-कश्मीर में मिलने को करता प्रदर्शन
🕒 3 weeks ago

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने संबोधन में राज्य की पूर्ण राज्य बहाली की मांग को पुरजोर तरीके से उठाया। श्रीनगर के ऐतिहासिक बख्शी स्टेडियम में आयोजित मुख्य समारोह में तिरंगा फहराने के बाद अपने संबोधन में उन्होंने केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस देने का आग्रह किया। इस दौरान उन्होंने एक ऐसा बयान दिया जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। उमर अब्दुल्ला ने दावा किया कि यदि अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त नहीं किया गया होता, तो आज पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के लोग भारत के साथ जम्मू-कश्मीर में विलय के लिए प्रदर्शन कर रहे होते। मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि अनुच्छेद 370 और 35ए जम्मू-कश्मीर की विशेष पहचान और संवैधानिक गारंटी थे, जिन्हें एकतरफा तरीके से समाप्त कर दिया गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार जम्मू-कश्मीर की राज्य बहाली और उसके संवैधानिक अधिकारों की बहाली के लिए प्रतिबद्ध है। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि 5 अगस्त 2019 के फैसले ने क्षेत्र के लोगों के विश्वास को गहरी चोट पहुंचाई है और इस विश्वास को बहाल करने का एकमात्र रास्ता पूर्ण राज्य का दर्जा वापस देना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी मांग किसी अलगाववादी एजेंडे का हिस्सा नहीं, बल्कि संविधान के दायरे में रहकर अपने अधिकारों की संवैधानिक लड़ाई है। उमर अब्दुल्ला के PoK संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान कश्मीर मुद्दे के अंतरराष्ट्रीय आयाम को रेखांकित करता है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता ने तर्क दिया कि विशेष दर्जा जम्मू-कश्मीर को भारत के साथ जोड़ने वाला एक पुल था, जिसे तोड़ने से अलगाव की भावना बलवती हुई है। उन्होंने कहा कि उस समय जम्मू-कश्मीर के लोग भारत के साथ अपनी पहचान को गर्व से जोड़ते थे, लेकिन आज परिस्थितियां बदल गई हैं। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह जम्मू-कश्मीर के लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए जल्द से जल्द विधानसभा चुनाव करवाए और पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करे। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कश्मीर घाटी में देशभक्ति का जज्बा चरम पर दिखा। श्रीनगर के लाल चौक से लेकर दूरदराज के गांवों तक तिरंगा यात्राएं निकाली गईं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। सुरक्षा बलों की कड़ी निगरानी के बीच समारोह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए। उमर अब्दुल्ला ने इस अवसर पर सुरक्षा बलों के जवानों और कोरोना योद्धाओं के बलिदान को भी याद किया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए अपनी सरकार की प्राथमिकताएं गिनाते हुए बेरोजगारी दूर करने, बुनियादी ढांचा मजबूत करने और सेब उद्योग को बढ़ावा देने जैसे कदमों का जिक्र किया। अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की जनता ने हमेशा लोकतांत्रिक मूल्यों में आस्था रखी है और आगे भी रखेगी। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वह संवाद की प्रक्रिया शुरू करे और जम्मू-कश्मीर के लोगों की आकांक्षाओं को समझे। राज्य की बहाली न केवल एक राजनीतिक मांग है, बल्कि यह क्षेत्र की शांति, स्थिरता और विकास के लिए अनिवार्य शर्त है। उमर अब्दुल्ला का यह भाषण आने वाले दिनों में जम्मू-कश्मीर की राजनीति की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है, क्योंकि इसने एक बार फिर राज्य के दर्जे और संवैधानिक अधिकारों के मुद्दे को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला दिया है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 15 Aug 2026