स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में वंदे मातरम् गायन को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने वंदे मातरम् के पूर्ण गायन को रोकने का प्रयास किया और इसका अपमान किया। इस आरोप के बाद सियासी गलियारों में हलचल मच गई और कई प्रमुख समाचार संस्थानों ने इस घटना को प्रमुखता से कवर किया। भाजपा के नेताओं का दावा है कि कार्यक्रम के दौरान जब वंदे मातरम् का पूर्ण गायन शुरू हुआ तो सोनिया गांधी ने आपत्ति जताई और उसे बीच में ही रुकवाने की कोशिश की। पार्टी ने इसे राष्ट्रीय गीत का अपमान बताते हुए कांग्रेस पर हमला बोला। वहीं, कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें भ्रामक और राजनीति से प्रेरित बताया है। पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि सोनिया गांधी केवल वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खरगे के लिए बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित कर रही थीं, जिसे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। इस पूरे प्रकरण पर अलग-अलग मीडिया संस्थानों ने अपनी रिपोर्टिंग में भिन्न पहलू सामने रखे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि सोनिया गांधी ने वंदे मातरम् गायन को रोकने का इशारा किया, जबकि अन्य रिपोर्ट्स में कांग्रेस के स्पष्टीकरण को प्रमुखता दी गई है। टाइम्स ऑफ इंडिया, इंडिया टुडे, न्यूज18 और टेलीग्राफ इंडिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों ने इस घटना को कवर करते हुए दोनों पक्षों के बयान प्रकाशित किए हैं। इस विवाद ने एक बार फिर राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर राजनीतिक दलों के बीच चल रही रस्साकशी को उजागर कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला आने वाले चुनावी माहौल में और तेज हो सकता है। भाजपा जहां इसे राष्ट्रवाद के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने के अवसर के रूप में देख रही है, वहीं कांग्रेस इसे भाजपा की ध्यान भटकाने की रणनीति बता रही है। जनता के बीच इस विवाद की क्या प्रतिक्रिया होगी, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा, लेकिन इतना तय है कि राष्ट्रीय गीत के सम्मान को लेकर राजनीति थमने का नाम नहीं ले रही। निष्कर्षतः, स्वतंत्रता दिवस जैसे पवित्र अवसर पर उपजे इस विवाद ने एक बार फिर साबित कर दिया कि राष्ट्रीय प्रतीक भी राजनीतिक लड़ाई के हथियार बन चुके हैं। जहां भाजपा इसे कांग्रेस की राष्ट्रविरोधी मानसिकता बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे सत्ता पक्ष का दुष्प्रचार करार दे रही है। सच जो भी हो, लेकिन इस तरह के विवाद राष्ट्रीय एकता और गरिमा के लिए शुभ संकेत नहीं माने जा सकते।