केंद्र सरकार ने बहुप्रतीक्षित जनगणना 2027 के लिए तैयारी तेज करते हुए 40 प्रश्नों का विस्तृत खाका अधिसूचित कर दिया है। इस बार की जनगणना में पारंपरिक जनसांख्यिकीय आंकड़ों के साथ-साथ जाति आधारित गणना, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की स्थिति, मोबाइल नंबर, आधार संख्या और बैंक खाते के विवरण जैसी संवेदनशील जानकारियां भी एकत्रित की जाएंगी। रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया द्वारा जारी घरेलू प्रश्नावली में इन सभी पहलुओं को समाहित किया गया है, जो देश की आबादी का सबसे व्यापक डेटाबेस तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। जनगणना का दूसरा चरण विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी चरण में जाति आधारित गणना को क्रियान्वित किया जाएगा। सरकारी सूत्रों के अनुसार, जाति संबंधी आंकड़े एकत्र करने के लिए सुव्यवस्थित प्रणाली विकसित की गई है, जिसमें प्रत्येक घर से स्वघोषित जाति की जानकारी ली जाएगी। इसके साथ ही एससी और एसटी श्रेणी के लोगों की पहचान के लिए अलग से कॉलम रखे गए हैं। डिजिटल युग की आवश्यकताओं को देखते हुए मोबाइल नंबर, आधार कार्ड नंबर और बैंक खाता संख्या जैसे विवरण भी मांगे गए हैं, ताकि सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। हालांकि, इस अधिसूचना के जारी होते ही राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार के जाति जनगणना के प्रारूप पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे 'नीति में खोट' करार दिया है। विपक्ष का आरोप है कि जाति आधारित गणना के लिए अपनाया गया तरीका अपारदर्शी है और इसमें स्पष्टता का अभाव है। कांग्रेस ने मांग की है कि जाति जनगणना को संवैधानिक दर्जा दिया जाए और इसकी प्रक्रिया को संसद में व्यापक चर्चा के बाद अंतिम रूप दिया जाए। वहीं, सरकार का पक्ष है कि यह कदम सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में ऐतिहासिक पहल है। विशेषज्ञों का मानना है कि जनगणना 2027 में डिजिटल पहचान पत्रों (आधार, मोबाइल, बैंक खाता) को शामिल करना डेटा की शुद्धता और योजनाओं के क्रियान्वयन में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकता है। इससे फर्जी लाभार्थियों की पहचान, डुप्लीकेशन रोकने और संसाधनों के इष्टतम आवंटन में मदद मिलेगी। साथ ही, जाति आधारित आंकड़े उपलब्ध होने से आरक्षण नीतियों, शैक्षिक एवं रोजगार अवसरों के वितरण में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया जा सकेगा। अंततः, जनगणना 2027 केवल आंकड़े जुटाने की कवायद नहीं, बल्कि नए भारत के निर्माण का आधारस्तंभ साबित होगी। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि डेटा संग्रह की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी, समावेशी और तकनीकी रूप से दक्ष है। सरकार को विपक्ष की आशंकाओं का समाधान करते हुए सभी हितधारकों को विश्वास में लेना होगा, ताकि यह महाअभियान अपने उद्देश्यों को पूर्णतः प्राप्त कर सके और देश के हर नागरिक तक विकास की रोशनी पहुंचाने का माध्यम बने।