लाल किले की प्राचीर से 78वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए देश की आर्थिक प्रगति का गौरवशाली चित्र प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि बीते 12 वर्षों में भारत ने 'फ्रेजाइल 5' की श्रेणी से निकलकर विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था का मुकाम हासिल किया है। यह परिवर्तन केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के प्रत्येक नागरिक की मेहनत, नीति-निर्माताओं की दूरदर्शिता और सुधारों की निरंतर श्रृंखला का परिणाम है। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर 'विकसित भारत 2047' के संकल्प को दोहराते हुए नए भारत की नींव रखने वाले कार्यों का उल्लेख किया। आर्थिक मोर्चे पर विस्तार से बोलते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि कैसे 2014 से पहले भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के प्रति संवेदनशील मानी जाती थी, जिसे 'फ्रेजाइल 5' का तमगा दिया गया था। आज वही भारत वैश्विक मंदी के बीच भी 7-8 प्रतिशत की विकास दर दर्ज कर रहा है। उन्होंने बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व निवेश, डिजिटल क्रांति, स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार और विनिर्माण क्षेत्र में 'मेक इन इंडिया' की सफलता को इस बदलाव के प्रमुख स्तंभ बताया। साथ ही, उन्होंने गरीबी उन्मूलन, वित्तीय समावेशन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि विकास का लाभ अंतिम पंक्ति तक पहुंच रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री ने छह बड़ी घोषणाएं करके युवाओं, किसानों और वंचित वर्गों के लिए नए द्वार खोले। इनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) प्रशिक्षण कार्यक्रम, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निःशुल्क कोचिंग योजना, कौशल विकास के लिए नए संस्थानों की स्थापना, हरित ऊर्जा मिशन का विस्तार, जल सुरक्षा के लिए 'जल जीवन मिशन' के अगले चरण और महिला उद्यमियों के लिए विशेष वित्तीय पैकेज शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने 'विकसित भारत' के लिए सात सूत्रीय 'सप्त धारा' रूपरेखा प्रस्तुत की, जिसमें सुशासन, बुनियादी ढांचा, सामाजिक न्याय, आर्थिक समृद्धि, सांस्कृतिक विरासत, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय सुरक्षा को समाहित किया गया है। स्वतंत्रता दिवस समारोह इस बार विशेष रूप से भव्य रहा, जहां 80वें स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में तिरंगे की छाया में विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। लाल किले पर ध्वजारोहण के बाद तीनों सेनाओं की संयुक्त परेड, स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक झांकियां और ड्रोन शो ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। देशभर के कोने-कोने से आए कलाकारों ने भारत की सांस्कृतिक विविधता का जीवंत प्रदर्शन किया। इस अवसर पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी की यह यात्रा असंख्य बलिदानों से बनी है और हमें उनके सपनों का भारत बनाना है। हालांकि, विपक्षी दल कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के पहनावे पर तंज कसते हुए राजनीतिक बयानबाजी की, जिसे सरकार समर्थकों ने ओछी राजनीति करार दिया। इन सबके बीच, प्रधानमंत्री का संदेश स्पष्ट रहा कि भारत अब रुकने वाला नहीं है। 'सप्त धारा' रूपरेखा और नई घोषणाएं देश को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में ठोस कदम हैं। जनभागीदारी, नवाचार और सुशासन के मंत्र के साथ भारत नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार है। यह स्वतंत्रता दिवस न केवल आजादी का उत्सव है, बल्कि नए संकल्पों की सिद्धि का शुभारंभ भी है।