📰 Kotputli News
Breaking News: स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी का आह्वान: 'दिमागी नक्सलियों' को पहचानें और अलग-थलग करें, विकसित भारत के लिए 'सप्तधारा' का मंत्र
🕒 3 weeks ago

लाल किले की प्राचीर से 78वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया। उन्होंने देश के सामने आंतरिक सुरक्षा के एक नए आयाम की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए 'दिमागी नक्सलियों' (अर्बन नक्सल) का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि ये तत्व समाज में विष घोलने का काम करते हैं और इन्हें पहचानकर, अलग-थलग करना बेहद आवश्यक है। उनका इशारा उन बुद्धिजीवियों और कार्यकर्ताओं की ओर था जो विकास की धारा को बाधित करने और सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने के लिए वैचारिक लड़ाई लड़ते हैं। इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने केवल चुनौतियों का ही जिक्र नहीं किया, बल्कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक विस्तृत रूपरेखा भी प्रस्तुत की। उन्होंने 'सप्तधारा' यानी सात धाराओं का उल्लेख किया जो राष्ट्र की प्रगति का आधार बनेंगी। इनमें गरीबों का कल्याण, किसानों की समृद्धि, युवाओं के लिए अवसर, नारी शक्ति का सशक्तिकरण, मध्यम वर्ग की मजबूती, आदिवासी समाज का गौरव और पूर्वोत्तर का विकास शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने आर्थिक मोर्चे पर बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि भारत जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा और फॉर्च्यून 500 कंपनियों की सूची में भारतीय बैंकों और उद्यमों का दबदबा बढ़ेगा। इस बार के स्वतंत्रता दिवस समारोह में एक ऐतिहासिक क्षण तब आया जब लाल किले पर पहली बार 'वंदे मातरम' का गायन हुआ। इस परंपरा की शुरुआत को सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने हाल ही में हुए 'कॉकरोच' विरोध प्रदर्शनों का परोक्ष जिक्र करते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए मुफ्त कोचिंग की व्यवस्था करने का वादा किया। यह कदम युवाओं में व्याप्त निराशा को दूर करने और उन्हें समान अवसर प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। प्रधानमंत्री के भाषण का केंद्रीय भाव 'सबका प्रयास' से 'विकसित भारत' की यात्रा को गति देना था। उन्होंने भ्रष्टाचार, परिवारवाद और तुष्टीकरण को देश के विकास में तीन बड़े रोड़ा बताते हुए इनके खिलाफ निर्णायक लड़ाई का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने नागरिकों से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का आग्रह किया। लाल किले से दिया गया यह संबोधन केवल सरकारी योजनाओं का बखान नहीं था, बल्कि यह एक वैचारिक दिशा-निर्देश था जो समाज के हर वर्ग को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास करता है। निष्कर्षतः, प्रधानमंत्री मोदी का यह भाषण आंतरिक सुरक्षा के प्रति सजगता, आर्थिक महत्वाकांक्षा और सामाजिक समरसता का एक समन्वित दस्तावेज है। 'दिमागी नक्सलियों' की पहचान का आह्वान जहां राष्ट्रीय एकता के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाता है, वहीं 'सप्तधारा' और मुफ्त कोचिंग जैसी घोषणाएं समावेशी विकास की रूपरेखा खींचती हैं। अब देखना यह होगा कि इन घोषणाओं को जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, ताकि 2047 तक विकसित भारत का सपना साकार हो सके।

Stay connected with Kotputli News for latest updates.


📲 Share on WhatsApp
✍️ By Pradeep Yadav | 15 Aug 2026