भारत सरकार ने आगामी जनगणना 2027 के लिए एक विस्तृत प्रश्नावली जारी की है जिसमें ग्यारह अतिरिक्त प्रश्न शामिल किए गए हैं। इस बार की जनगणना में जाति विवरण, आधार संख्या, दूरभाष संख्या, बचत खाता विवरण तथा कोरोना टीकाकरण की स्थिति जैसे संवेदनशील आंकड़े एकत्र किए जाएंगे। भारत के महापंजीयक द्वारा अधिसूचित घरेलू प्रश्नावली में इन नए बिंदुओं को जोड़ने का उद्देश्य देश की जनसांख्यिकीय तस्वीर को और अधिक सटीक बनाना है। जनगणना के दूसरे चरण में जनसंख्या गणना के दौरान प्रत्येक परिवार से ये जानकारियां मांगी जाएंगी। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार यह कदम सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, संसाधनों के उचित आवंटन तथा सामाजिक-आर्थिक नीतियों के निर्माण में सहायक सिद्ध होगा। नए प्रश्नों में प्रवास, शिक्षा स्तर, रोजगार स्थिति तथा अंकीय पहुंच जैसे विषय भी शामिल हैं जिससे ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित जाति जनगणना के प्रारूप पर गंभीर संदेह व्यक्त किया है। पार्टी का आरोप है कि प्रश्नावली की संरचना पारदर्शी नहीं है और इससे सामाजिक न्याय के लक्ष्य पूरे नहीं होंगे। कांग्रेस ने मांग की है कि जाति आधारित आंकड़ों को सार्वजनिक किया जाए तथा सभी समुदायों के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र निगरानी तंत्र स्थापित किया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि जनगणना 2027 देश के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है जहां आंकड़ा संग्रह की व्यापकता और सटीकता नीति निर्धारण की दिशा तय करेगी। हालांकि नागरिकों की निजता और आंकड़ा सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी व्यक्त की जा रही हैं। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि एकत्रित जानकारी का उपयोग केवल कल्याणकारी कार्यों तक सीमित रहे और किसी भी प्रकार के दुरुपयोग को रोका जाए। इस प्रकार जनगणना 2027 न केवल आंकड़ों का संकलन बल्कि समावेशी विकास की नींव रखने का कार्य करेगी।