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Breaking News: सुप्रीम कोर्ट ने 'इंडियाज गॉट लेटेंट' मामले में समीर रैना समेत सभी के खिलाफ दर्ज FIRs रद्द कीं, कॉमेडियंस को बड़ी राहत
🕒 3 weeks ago

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए लोकप्रिय यूट्यूब शो 'इंडियाज गॉट लेटेंट' के होस्ट समीर रैना, रणवीर अल्लाहबादिया और अन्य प्रतिभागियों के खिलाफ दिव्यांग व्यक्तियों पर कथित असंवेदनशील टिप्पणियों के मामले में देशभर में दर्ज सभी एफआईआर को रद्द कर दिया। न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टाइन जॉर्ज मसीह की पीठ ने इस मामले में सभी आपराधिक कार्यवाहियों को बंद करने का आदेश दिया, जिससे कॉमेडी और कंटेंट क्रिएटर समुदाय को बड़ी कानूनी राहत मिली है। यह फैसला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और क्रिएटिव कंटेंट की सीमाओं पर महत्वपूर्ण विर्श को नई दिशा देगा। मामले की पृष्ठभूमि में इसी साल फरवरी में शो के एक एपिसोड के दौरान दिव्यांग समुदाय के प्रति कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर मुंबई, असम, राजस्थान और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में एफआईआर दर्ज की गई थीं। शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि शो में दिव्यांग व्यक्तियों का मजाक उड़ाया गया और उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाई गई, जिसके बाद पुलिस ने आईपीसी की विभिन्न धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए थे। इसके चलते समीर रैना और रणवीर अल्लाहबादिया को कई बार पुलिस के सामने पेश होना पड़ा था और उनके उपकरण भी जब्त किए गए थे। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने दलील दी थी कि यह एक कॉमेडी शो है जिसका उद्देश्य मनोरंजन है, न कि किसी समुदाय का अपमान करना। उन्होंने तर्क दिया कि कंटेंट क्रिएटर्स पर आपराधिक मुकदमे चलाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अनुचित प्रतिबंध है और एक ही अपराध के लिए कई राज्यों में एफआईआर दर्ज करना कानून का दुरुपयोग है। सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए कहा कि एक ही घटना के लिए कई राज्यों में समानांतर कार्यवाही नहीं चलाई जा सकती और यह याचिकाकर्ताओं के मौलिक अधिकारों का हनन होगा। शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि भले ही कुछ टिप्पणियां असंवेदनशील या खराब स्वाद वाली हो सकती हैं, लेकिन उन्हें आपराधिक कृत्य नहीं माना जा सकता जब तक कि उनमें किसी समुदाय के प्रति घृणा या हिंसा भड़काने का स्पष्ट इरादा न हो। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि शो के निर्माताओं ने विवाद के बाद संबंधित एपिसोड को हटा दिया था और सार्वजनिक माफी भी मांगी थी। इस फैसले को डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है, जो अक्सर विभिन्न राज्यों में दर्ज होने वाली एफआईआर के कारण परेशान होते हैं। इस निर्णय का दूरगामी असर भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल मनोरंजन उद्योग पर पड़ेगा। यह फैसला कंटेंट क्रिएटर्स को कानूनी सुरक्षा का एहसास दिलाता है, साथ ही उन्हें अपनी सामग्री में संवेदनशीलता बरतने की जिम्मेदारी भी याद दिलाता है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भविष्य में इसी तरह के मामलों में एक महत्वपूर्ण नजीर बनेगा, जहां रचनात्मक अभिव्यक्ति और कानूनी सीमाओं के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता होगी। समीर रैना और उनकी टीम ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे सच और न्याय की जीत बताया है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 14 Aug 2026