केंद्र सरकार ने आगामी जनगणना 2027 के लिए अधिसूचित 40 प्रश्नों की सूची जारी कर दी है। इस बार की जनगणना में जाति, कोविड टीकाकरण की स्थिति तथा आधार सहित विभिन्न पहचान पत्रों के विवरण को शामिल किया गया है। यह कदम देश की जनसांख्यिकीय तस्वीर को अधिक व्यापक और सटीक बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। जनगणना आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, प्रश्नावली में पारंपरिक जानकारियों के अलावा सामाजिक-आर्थिक प्रोफाइल, प्रवासन, शिक्षा, रोजगार, आवासीय सुविधाएं, पेयजल, स्वच्छता, बिजली, वाहन स्वामित्व, इंटरनेट पहुंच आदि विषयों को कवर किया गया है। विशेष रूप से जाति विवरण का समावेश लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करता है, जबकि कोविड टीकाकरण डेटा महामारी के बाद की स्वास्थ्य योजना के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। आधार नंबर, मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस जैसे पहचान दस्तावेजों का विवरण भी मांगा गया है ताकि डेटा की प्रमाणिकता सुनिश्चित हो सके। हालांकि इस कदम पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। प्रमुख विक्षी दल कांग्रेस ने सरकार की मंशा पर गंभीर संदेह व्यक्त करते हुए कहा है कि जाति आधारित जनगणना के नाम पर केवल चुनावी लाभ लेने का प्रयास किया जा रहा है। पार्टी ने मांग की है कि जाति जनगणना को अलग से और पारदर्शी तरीके से कराया जाए। वहीं सरकार का कहना है कि यह कदम नीति निर्माण, संसाधन आवंटन और सामाजिक न्याय की योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक है। जनगणना 2027 की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल माध्यम से पूरी की जाएगी, जिससे डेटा संग्रहण में गति और सटीकता आएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यापक डेटाबेस अगले दशक की विकास योजनाओं, आरक्षण नीतियों, स्वास्थ्य ढांचे और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों का आधार बनेगा। अंततः यह जनगणना न केवल संख्याओं का संकलन होगी, बल्कि भारत के विविध समाज की वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत करेगी, जिससे समावेशी विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।