उत्तराखंड के चमोली जिले में एक निर्माणाधीन सुरंग में अचानक पानी और मलबा घुस जाने से भीषण हादसा हो गया। इस दुर्टना में छह मजदूरों की मौत हो गई जबकि 14 अन्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। घटना शनिवार देर रात की है जब तपोवन-विष्णुगाड जलविद्युत परियोजना की सुरंग में काम चल रहा था। अचानक पहाड़ से भारी मात्रा में पानी और मलबा सुरंग के अंदर घुस गया जिससे वहां काम कर रहे मजदूर फंस गए। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय पुलिस की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और बचाव अभियान शुरू किया। बचाव दलों ने कड़ी मशक्कत के बाद घायल मजदूरों को सुरंग से बाहर निकाला और उन्हें नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। गंभीर रूप से घायल कुछ मजदूरों को हेलीकॉप्टर से षिकेश एम्स रेफर किया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। साथ ही उन्होंने घायलों के समुचित इलाज के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी चमोली ने बताया कि सुरंग में फंसे दो मजदूरों की तलाश अभी जारी है जबकि 16 मजदूरों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। यह परियोजना एनटीपीसी द्वारा संचालित है और इसकी सुरंग का निर्माण कार्य पिछले कई वर्षों से चल रहा है। क्षेत्र में भारी बारिश और भूस्लन की आशंका को देखते हुए सुरक्षा मानकों पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कंपनी द्वारा सुरक्षा उपायों की अनदेखी की गई जिसके कारण यह हादसा हुआ। इससे पहले भी इस क्षेत्र में निर्माण कार्यों के दौरान कई हादसे हो चुके हैं। प्रशासन ने घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है। बचाव अभियान अभी भी जारी है और सुरंग के अंदर फंसे शेष मजदूरों को निकालने के लिए आधुनिक उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है। एनडीआरएफ के महानिदेशक ने बताया कि उनकी टीमें चौबीसों घंटे काम कर रही हैं। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में भारी बारिश की चेतावनी दी है जिससे बचाव कार्य में बाधा आ सकती है। राज्य सरकार ने केंद्र से अतिरिक्त सहायता मांगी है। इस हादसे ने एक बार फिर पहाड़ी राज्यों में बड़ी परियोजनाओं की सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रभाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्तराखंड जैसे संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में विकास परियोजनाओं के निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करना अत्यंत आवश्यक है। इस दुखद घटना से सबक लेते हुए सरकार और निर्माण एजेंसियों को भविष्य में ऐसी दुर्टनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए यह उम्मीद की जाती है कि घायल मजदूर जल्द स्वस्थ होंगे और लापता मजदूर सुरक्षित मिल जाएंगे।