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Breaking News: झारखंड में छात्र आंदोलन तेज: कार्यकर्ता देवेंद्र महतो ने सिविल सर्जन से मांगी धरना स्थल पर लौटने की अनुमति, परीक्षा घोटाले में सीआईडी की छापेमारी से बढ़ा तनाव
🕒 3 weeks ago

झारखंड की राजधानी रांची में पिछले कई दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया है। सामाजिक कार्यकर्ता देवेंद्र महतो ने स्वास्थ्य कारणों से अस्पताल में भर्ती होने के बाद अब सिविल सर्जन से लिखित अनुमति मांगी है कि उन्हें वापस धरना स्थल पर जाने दिया जाए। देवेंद्र महतो झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों के आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। उनकी मांग है कि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मान लेती, वे आंदोलन जारी रखेंगे। अस्पताल प्रशासन ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए अभी तक उन्हें छुट्टी नहीं दी है, जिससे छात्रों में रोष बढ़ रहा है। आंदोलनरत छात्रों ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि देवेंद्र महतो की स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों को जानबूझकर रोका जा रहा है ताकि आंदोलन को कमजोर किया जा सके। छात्र नेताओं का कहना है कि सरकार उनकी जायज मांगों को सुनने के बजाय दमनकारी नीतियां अपना रही है। इस बीच, झारखंड उच्च न्यायालय ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए सरकार से जवाब तलब किया है। छात्रों का आरोप है कि जेपीएससी की प्रारंभिक और मुख्य परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है और योग्य अभ्यर्थियों को बाहर कर दिया गया है। इसी कड़ी में केंद्रीय जांच विभाग (सीआईडी) ने परीक्षा घोटाले की जांच तेज करते हुए राज्यभर में कई स्थानों पर छापेमारी की है। इस कार्रवाई में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें कुछ सरकारी अधिकारी और परीक्षा केंद्रों से जुड़े लोग शामिल बताए जा रहे हैं। सीआईडी की इस कार्रवाई को छात्र अपनी जीत के रूप में देख रहे हैं, लेकिन उनका कहना है कि असली गुनहगार अभी भी पकड़ से बाहर हैं। गिरफ्तार लोगों से पूछता में कई अहम खुलासे होने की संभावना है, जिससे घोटाले की परतें खुल सकती हैं। आंदोलन को मिल रहे व्यापक जनसमर्थन का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यकर्ता और हिंदुत्ववादी संगठन भी धरना स्थल पर छात्रों के लिए भोजन और अन्य जरूरी सामान की व्यवस्था कर रहे हैं। इससे आंदोलन को सामाजिक स्वीकृति मिल रही है। वहीं, द टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को सालों की मेहनत, लाखों रुपये खर्च करने और उम्र निकल जाने के बावजूद निराशा हाथ लग रही है। यह स्थिति केवल झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश के युवाओं की पीड़ा को दर्शाती है। समाजशास्त्रियों का मानना है कि यह आंदोलन केवल परीक्षा में धांधली के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्था में गहरे बैठे भ्रष्टाचार और युवाओं के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ के विरुद्ध है। सरकार को चाहिए कि वह छात्रों से संवाद करे, सीआईडी जांच को निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पूरा कराए, और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे। साथ ही परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। देवेंद्र महतो की जल्द स्वस्थ होकर आंदोलन में वापसी और छात्रों की मांगों पर सरकार का सकारात्मक रुख ही इस गतिरोध का समाधान निकाल सकता है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 14 Aug 2026