एयर इंडिया की फुकेट से दिल्ली आ रही उड़ान संख्या एआई-376 में हुई गंभीर तकनीकी खामियों और पायलट की लापरवाही का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। आधिकारिक दस्तावेजों और सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, इस उड़ान के दौरान विमान के हाइड्रोलिक सिस्टम में एक नहीं बल्कि तीन-तीन बार अलर्ट जारी हुए थे, जिसके बाद ऑटोपायलट सिस्टम स्वतः ही डिस्कनेक्ट हो गया था। गंभीर बात यह है कि एयरलाइन प्रबंधन ने इस पूरे घटनाक्रम को महज 'खराब मौसम और टर्बुलेंस' बताकर रफा-दफा करने का प्रयास किया, जबकि वास्तविकता कहीं अधिक भयावह थी। जांच से जुड़े सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उड़ान के दौरान कैप्टन का व्यवहार बेहद असामान्य और चिंताजनक था। बताया जा रहा है कि पायलट इन कमांड (पीआईसी) कॉकपिट की फर्श पर बैठ गए थे, धूम्रपान करने का प्रयास किया था और वे ठीक से चल फिर भी नहीं पा रहे थे। इस गंभीर स्थिति के बावजूद, उड़ान से पहले नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के अनिवार्य नियमों के तहत पायलट का ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट या ड्रग टेस्ट नहीं कराया गया था, जो सुरक्षा मानकों का खुला उल्लंघन है। सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब कैप्टन का कन्फर्मेटरी ड्रग टेस्ट कराया गया, जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। सूत्रों के मुताबिक, टेस्ट में मारिजुआना (गांजा) के अंश पाए गए हैं। 'द हिंदू' और 'टाइम्स ऑफ इंडिया' जैसे प्रतिष्ठित समाचार माध्यमों ने इस बात की पुष्टि की है। यह घटना न केवल यात्रियों की जान जोखिम में डालने का मामला है, बल्कि यह एयरलाइन के सुरक्षा प्रोटोकॉल और क्रू रिसोर्स मैनेजमेंट पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय और डीजीसीए ने इस पूरे प्रकरण को बेहद गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं। एयर इंडिया प्रबंधन पर आरोप है कि उसने तकनीकी खराबी को छिपाने के लिए 'टर्बुलेंस' की आड़ ली और पायलट की मेडिकल फिटनेस की अनदेखी की। विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोलिक सिस्टम की ट्रिपल फेल्योर और ऑटोपायलट डिस्कनेक्ट होने की स्थिति में पायलट का पूरी तरह होश में होना और प्रशिक्षित होना अनिवार्य होता है, लेकिन यहां स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत थी। इस घटना ने भारतीय विमानन क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर गहरी चोट की है। जहां एक ओर यात्री सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर इस तरह की लापरवाही पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता को कठघरे में खड़ा करती है। डीजीसीए की जांच रिपोर्ट आने के बाद एयरलाइन और दोषी क्रू सदस्यों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी घटना की पुनरावृत्ति न हो सके।