संसद के मानसून सत्र में NEET परीक्षा और छात्रों के मुद्दे पर बहस को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तनातनी चरम पर पहुंच गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर आज ही से इस मुद्दे पर चर्चा के लिए समय आवंटित करने का आग्रह किया था। शाह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार छात्रों से जुड़े हर सवाल का जवाब देने और विस्तृत चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। इसके बावजूद विपक्ष की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली, जिससे संसद की कार्यवाही लगातार बाधित हो रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गृह मंत्री के इस प्रस्ताव पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे सरकार की बातें सुनना नहीं चाहते। उनका आरोप है कि सरकार NEET परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने के बजाय केवल बहस के जरिए मामले को टालना चाहती है। विपक्ष का कहना है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच का आदेश नहीं दिया जाता, तब तक किसी भी चर्चा का कोई औचित्य नहीं है। इस गतिरोध के चलते संसद के दोनों सदनों में हंगामा जारी है और महत्वपूर्ण विधायी कार्य ठप पड़े हैं। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के रवैये पर गहरी निराशा जताते हुए इसे "पूरी तरह हताशा" भरा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष NEET मुद्दे पर लोकसभा में बहस से "भाग रहा" है क्योंकि उनके पास तथ्य नहीं हैं। रिजिजू ने कहा कि सरकार की ओर से बार-बार पहल करने के बावजूद विपक्ष चर्चा से बच रहा है, जो दर्शाता है कि उसकी मंशा समाधान ढूंढने की नहीं, बल्कि केवल राजनीतिक रोटियां सेंकने की है। इस "अद्वितीय स्थिति" पर सरकार के मंत्रियों ने खेद जताया जहां सत्ता पक्ष बहस चाहती है और विपक्ष उससे इनकार कर रहा है। दरअसल, NEET-UG 2024 के परिणाम जारी होने के बाद से ही पेपर लीक, ग्रेस मार्क्स और अनियमितताओं के आरोपों को लेकर देशभर के छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में भी कई याचिकाएं लंबित हैं। सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के महानिदेशक को हटाने और जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित करने जैसे कदम उठाए हैं, लेकिन विपक्ष इन्हें नाकाफी बता रहा है। छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है और राजनीतिक दल अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं। इस गतिरोध का समाधान तभी संभव है जब दोनों पक्ष अपने अहंकार को छोड़कर छात्रों के हित को सर्वोपरि रखें। संसद लोकतंत्र का मंदिर है और वहां संवाद से ही समाधान निकलता है। सरकार को विपक्ष की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, तो विपक्ष को भी चर्चा में भाग लेकर अपनी बात रखनी चाहिए। देश के लाखों छात्र और उनके अभिभावक संसद की ओर आशा भरी नजरों से देख रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही यह गतिरोध टूटेगा और छात्रों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर सार्थक चर्चा होकर कोई ठोस नतीजा निकलेगा।