संसद के मानसून सत्र का 18वां दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ गया। मंगलवार को कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों ने विभिन्न मुद्दों पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया, जिसके चलते लोकसभा अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। वहीं राज्यसभा में भी विपक्ष के सांसदों ने सभापति के आसन के निकट पहुंचकर नारेबाजी की, जिससे सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी। संसद के दोनों सदनों में गतिरोध बरकरार रहने से विधायी कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में विपक्ष के सवालों का सामना करने की तैयारी जताते हुए कहा कि वे किसी भी मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार हैं और हर सवाल का जवाब देंगे। उन्होंने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि वे NEET परीक्षा समेत सभी मुद्दों पर खुली बहस के लिए तैयार हैं। शाह के इस बयान को सरकार की ओर से विपक्ष के आरोपों का सीधा जवाब माना जा रहा है। गृह मंत्री ने संसदीय मर्यादा का पालन करते हुए विपक्ष से सदन चलाने में सहयोग की अपील भी की। वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अमित शाह के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें शाह का भाषण सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं है। राहुल ने स्पष्ट किया कि वे गृह मंत्री के लेक्चर में रुचि नहीं रखते, बल्कि वे जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर चर्चा चाहते हैं। कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि सरकार असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए बयानबाजी कर रही है। विपक्ष NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं, महंगाई, बेरोजगारी और मणिपुर हिंसा जैसे मुद्दों पर प्रधानमंत्री के बयान की मांग पर अड़ा हुआ है। संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने विपक्ष पर सदन न चलने देने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष हंगामा करके जनता के पैसे की बर्बादी कर रहा है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वे संसदीय परंपराओं का सम्मान करें और सदन की गरिमा बनाए रखें। उधर, विपक्षी गठबंधन INDIA के घटक दलों ने संयुक्त रणनीति के तहत सरकार को घेरने का फैसला किया है, जिससे आने वाले दिनों में भी गतिरोध बने रहने के आसार हैं। संसद का मानसून सत्र अब अपने अंतिम चरण में पहुंच रहा है, लेकिन अब तक कई महत्वपूर्ण विधेयक लंबित पड़े हैं। दोनों पक्षों के अड़ियल रवैये से संसदीय लोकतंत्र की मर्यादा पर सवाल उठ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस गतिरोध का समाधान केवल संवाद और सहमति से ही निकल सकता है। जनता की अपेक्षा है कि उनके प्रतिनिधि सदन में सार्थक चर्चा करें, न कि हंगामा। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में कोई बीच का रास्ता निकलता है या सत्र हंगामे की भेंट चढ़ जाता है।