📰 Kotputli News
Breaking News: जेप्टो के बेंगलुरु गोदाम में छापा: गंदगी और अस्वच्छता का भयावह खुलासा, खाद्य सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
🕒 3 weeks ago

बेंगलुरु में क्विक-कॉमर्स दिग्गज जेप्टो के एक प्रमुख गोदाम पर हाल ही में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा किए गए औचक छापे ने पूरे उद्योग को हिलाकर रख दिया है। एनडीटीवी, इंडिया टुडे और टाइम्स ऑफ इंडिया जैसी प्रमुख मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, निरीक्षण के दौरान गोदाम की स्थिति को 'अत्यंत अस्वच्छ' करार दिया गया है। अधिकारियों ने पाया कि खाद्य पदार्थों के खुले पैकेट, टूटी बोतलें और सड़े-गले सामान खुले में पड़े थे, जो मानव उपभोग के लिए बिल्कुल उपयुक्त नहीं थे। इस कार्रवाई ने त्वरित वितरण मॉडल की पृष्ठभूमि में चल रही गुणवत्ता नियंत्रण की घोर उपेक्षा को उजागर कर दिया है। छापेमारी के दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने गोदाम के विभिन्न हिस्सों से नमूने एकत्र किए और तत्काल प्रभाव से कई खाद्य वस्तुओं को जब्त कर नष्ट करवा दिया। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, गोदाम में कीट-पतंगों का प्रकोप, फर्श पर गंदगी का ढेर और अनुचित भंडारण तापमान जैसी गंभीर अनियमितताएं मिलीं। यह स्थिति तब और चिंताजनक हो जाती है जब यह गोदाम प्रतिदिन हजारों घरों में दूध, ब्रेड, फल-सब्जियां और पैकेज्ड फूड जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति का केंद्र था। अधिकारियों ने कंपनी प्रबंधन को कड़ी फटकार लगाते हुए तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं और लाइसेंस निलंबन की चेतावनी भी जारी की है। इस घटना का असर केवल जेप्टो तक सीमित नहीं रहा। डेक्कन हेराल्ड की खबर के अनुसार, इस छापेमारी के बाद बेंगलुरु में रेस्तरां और खाद्य प्रतिष्ठानों पर भी निगरानी बढ़ा दी गई, जिसके चलते कई प्रतिष्ठानों में ग्राहकों की आवक में भारी गिरावट दर्ज की गई और ऑनलाइन बुकिंग तक रद्द होने लगीं। द हिंदू ने बताया कि प्रशासन ने होटलों और ढाबों को खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता मानकों को सख्ती से लागू करने का आदेश जारी किया है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने इसे 'रसोई का गोपनीय सच' बताते हुए मुंबई और बेंगलुरु में चल रहे ऐसे ही अन्य मामलों की ओर इशारा किया है, जहां सड़ांध, छापे और वास्तविकता की जांच एक साथ सामने आ रही हैं। इस पूरे प्रकरण ने क्विक-कॉमर्स के 'स्पीड फर्स्ट' दृष्टिकोण पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि 10-15 मिनट में डिलीवरी का दबाव वेयरहाउस स्तर पर स्वच्छता प्रोटोकॉल की बलि ले रहा है। उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि ऐसी कंपनियों पर भारी जुर्माने के साथ-साथ आपराधिक मामले भी दर्ज किए जाने चाहिए, क्योंकि यह सीधे तौर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य से खिलवाड़ है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) को भी अपनी ऑडिट प्रक्रिया को और कड़ा करने की आवश्यकता है। अंततः, यह घटना एक चेतावनी है कि सुविधा की दौड़ में स्वच्छता और गुणवत्ता से समझौता कतई स्वीकार्य नहीं है। जेप्टो जैसी कंपनियों को अपनी आंतरिक ऑडिट प्रणाली को पारदर्शी बनाना होगा और उपभोक्ताओं का विश्वास पुनः अर्जित करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। सरकार और नियामक एजेंसियों को भी नियमित औचक निरीक्षण की व्यवस्था को स्थायी बनाना होगा, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोहराई न जा सके। जनस्वास्थ्य सर्वोपरि है और इससे समझौता करने वालों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनानी ही होगी।

Stay connected with Kotputli News for latest updates.


📲 Share on WhatsApp
✍️ By Pradeep Yadav | 12 Aug 2026