अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प नाटो शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद तुर्की से गुप्त रूप से रवाना हो गए, क्योंकि उन्हें ईरान से संभावित खतरे की खुफिया जानकारी मिली थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रम्प ने अपना विमान बदलकर सुरक्षित रास्ते से वापसी की। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और पूर्व राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीबीसी और द हिंदू की रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रम्प ने स्वयं इस बात की पुष्टि की है कि उन्होंने नाटो शिखर सम्मेलन के बाद तुर्की में अपना विमान बदला था। उन्होंने कहा कि वह सीक्रेट सर्विस और सैन्य अधिकारियों की सलाह पर चलते हैं। ट्रम्प ने यह भी स्वीकार किया कि उन्हें अक्सर धमकियां मिलती रहती हैं, लेकिन इस बार खतरा इतना गंभीर था कि तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता पड़ी। खुफिया सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि ईरान की ओर से ट्रम्प पर हमले की योजना बनाई जा रही थी, जिसकी भनक अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को लग गई। इसके बाद सीक्रेट सर्विस ने तुरंत एक वैकल्पिक योजना तैयार की और ट्रम्प को एक अलग विमान से गुप्त मार्ग से रवाना किया गया। इस पूरी प्रक्रिया को बेहद गोपनीय रखा गया था और मीडिया को इसकी भनक तक नहीं लगने दी गई। टाइम्स ऑफ इंडिया और इंडिया टुडे की रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रम्प ने कहा कि वह सीक्रेट सर्विस और सैन्य नेतृत्व पर पूरा भरोसा करते हैं और उनकी सुरक्षा के लिए जो भी कदम जरूरी हों, वे उठाए जाते हैं। इस घटना ने 1994 में तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के विमान बदलने की घटना की याद दिला दी, जब एक रिपोर्टर ने 26 साल बाद उस घटना का खुलासा किया था। इस पूरे प्रकरण ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा प्रोटोकॉल और खुफिया सूचनाओं के महत्व को फिर से रेखांकित किया है। ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को देखते हुए, पूर्व राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं भविष्य में भी हो सकती हैं, इसलिए सुरक्षा एजेंसियों को हमेशा तैयार रहना होगा।