📰 Kotputli News
Breaking News: सीरिया की ऐतिहासिक अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद और आतेफ नजीब को मौत की सजा सुनाई
🕒 4 weeks ago

सीरिया की एक ऐतिहासिक अदालत ने सोमवार को देश के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद और उनके खुफिया प्रमुख आतेफ नजीब को मानवता के विरुद्ध अपराधों के लिए मौत की सजा सुनाई है। यह फैसला सीरिया के गृहयुद्ध के दौरान किए गए अत्याचारों के लिए जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अदालत ने दोनों को अनुपस्थिति में दोषी ठहराया है, क्योंकि असद दिसंबर 2024 में विद्रोहियों के हमले के बाद रूस भाग गए थे, जबकि नजीब का ठिकाना अभी तक अज्ञात है। इस मुकदमे की सुनवाई दमिश्क की एक विशेष आपराधिक अदालत में हुई, जिसकी स्थापना नई अंतरिम सरकार द्वारा युद्ध अपराधों की जांच के लिए की गई थी। अभियोजन पक्ष ने असद और नजीब पर 2011 में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के हिंसक दमन, राजनीतिक बंदियों को यातना देने, रासायनिक हथियारों का उपयोग करने और लाखों नागरिकों को विस्थापित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। गवाहों और दस्तावेजी सबूतों के आधार पर अदालत ने पाया कि दोनों ने व्यवस्थित रूप से मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन किया और सीरियाई जनता के खिलाफ अपराधों की योजना बनाई तथा उन्हें अंजाम दिया। इस फैसले को अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठनों ने एक प्रतीकात्मक जीत बताया है, हालांकि इसकी व्यावहारिक सीमाएं भी हैं। चूंकि असद वर्तमान में मॉस्को में शरण लिए हुए हैं और रूस के साथ सीरिया का कोई प्रत्यर्पण समझौता नहीं है, इसलिए सजा पर अमल होना निकट भविष्य में असंभव प्रतीत होता है। फिर भी, सीरिया के नए प्रशासन ने इसे न्याय की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर करार दिया है और कहा है कि वे अंतरराष्ट्रीय न्यायालयों के साथ मिलकर दोषियों को जवाबदेह ठहराने के प्रयास जारी रखेंगे। पीड़ितों के परिवारों और सीरियाई विपक्ष ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे लंबे इंतजार के बाद मिला न्याय बताया है। कई सालों तक असद के शासनकाल में गायब हुए लोगों के परिजनों ने अदालत के बाहर भावुक दृश्यों में इस फैसले को अपने प्रियजनों की याद में एक श्रद्धांजलि बताया। संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ ने भी इस फैसले को सीरिया में जवाबदेही स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया, साथ ही उन्होंने नई सरकार से न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने का आग्रह किया। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भले ही तत्काल क्रियान्वित न हो सके, लेकिन यह भविष्य के तानाशाहों के लिए एक कड़ा संदेश है कि सत्ता का दुरुपयोग और नरसंहार अंततः न्याय की जद में आते हैं। सीरिया की नई सरकार के सामने अब चुनौती यह है कि वह इस न्यायिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए अन्य युद्ध अपराधियों को भी कानून के कठघरे में लाए, ताकि देश में स्थायी शांति और सुलह की नींव रखी जा सके।

Stay connected with Kotputli News for latest updates.


📲 Share on WhatsApp
✍️ By Pradeep Yadav | 11 Aug 2026