संसद भवन परिसर में मंगलवार को उस समय गहमागहमी का माहौल बन गया जब सत्ताधारी एनडीए और विपक्षी कांग्रेस के सांसदों ने एक साथ अलग-अलग मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। एक तरफ भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए सांसदों ने झारखंड में प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर राहुल गांधी के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था, तो दूसरी तरफ कांग्रेस सांसद गृह मंत्री अमित शाह और राम मंदिर से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने में जुटे थे। इस दोहरे प्रदर्शन ने संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत से ही राजनीतिक तापमान को चरम पर पहुंचा दिया है। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने राहुल गांधी पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें 'आदतन झूठा' करार दिया और कांग्रेस पर 'चुनिंदा लोकतंत्र' अपनाने का आरोप लगाया। प्रधान ने कहा कि राहुल गांधी झारखंड की घटना पर भ्रामक बयानबाजी कर रहे हैं जबकि उनकी अपनी पार्टी शासित राज्यों में ऐसी घटनाओं पर चुप्पी साध लेते हैं। भाजपा सांसदों ने 'शर्म करो राहुल गांधी' के नारे लगाते हुए झारखंड पुलिस की कार्रवाई को न्यायसंगत ठहराया और आरोप लगाया कि कांग्रेस आदिवासी अधिकारों के नाम पर राजनीति कर रही है। वहीं, कांग्रेस की तरफ से प्रियंका गांधी वाड्रा ने मोर्चा संभालते हुए भाजपा के आरोपों का तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे हथकंडे अपना रही है। कांग्रेस सांसदों ने अमित शाह के हालिया बयानों और राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े विवादों पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा। विपक्ष का आरोप है कि सरकार संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है और विरोध की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। झारखंड का मुद्दा इस टकराव का केंद्रबिंदु बना रहा जहां हाल ही में आदिवासी प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई हुई थी। एनडीए सांसदों का तर्क था कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बाध्य है, जबकि कांग्रेस ने इसे अत्याचार करार दिया। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर संवेदनशील मुद्दों का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया। संसद परिसर में लगे नारे और तख्तियां इस बात की गवाही दे रहे थे कि यह लड़ाई अब सदन के अंदर तक जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि संसद का मौजूदा सत्र हंगामेदार रहने वाला है। जहां भाजपा झारखंड और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर कांग्रेस को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है, वहीं कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता और अल्पसंख्यक अधिकारों को अपना मुख्य हथियार बना रही है। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच यह तकरार और तेज होने के आसार हैं, जिससे संसदीय कार्यवाही प्रभावित होना तय माना जा रहा है।